नई दिल्ली. राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर समय तेजी से कम होता जा रहा है। Rajasthan State Election Commission को Rajasthan High Court ने 31 जुलाई तक चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया है। हालांकि परिसीमन और मतदाता सूची को अंतिम रूप देने का काम पूरा हो चुका है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया के कई अहम चरण अभी बाकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
मतदाता सूची का काम पूरा, लेकिन आगे की प्रक्रिया बाकी
राज्य निर्वाचन आयोग ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की मतदाता सूचियों को अंतिम रूप दे चुका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पंचायत क्षेत्रों में लाखों मतदाता और शहरी निकायों में बड़ी संख्या में वोटर चुनाव में हिस्सा लेंगे।
अब अगला महत्वपूर्ण चरण आरक्षित सीटों के निर्धारण का है। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिलाओं के लिए आरक्षण तय किए बिना चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया जा सकता।
आरक्षण निर्धारण बना बड़ी चुनौती
सूत्रों के अनुसार निर्वाचन आयोग राज्य सरकार से आरक्षित सीटों का विवरण मांग चुका है। इस संबंध में हाल ही में रिमाइंडर भी भेजा गया, लेकिन अभी तक अंतिम जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं हुई है।
जब तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी नहीं होती, चुनाव अधिसूचना जारी करना संभव नहीं माना जा रहा।
पंचायत और निकाय चुनाव एक साथ कराना कठिन
चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि पंचायत और निकाय चुनावों की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। दोनों चुनाव एक ही दिन करवाना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक:
चुनाव अधिसूचना जारी करना
नामांकन प्रक्रिया
नामांकन पत्रों की जांच
नाम वापसी
मतदान की तैयारी
मतदान और मतगणना
जैसे चरणों को पूरा करने में कम से कम 40 से 45 दिन का समय लगता है।
ऐसे में यदि प्रक्रिया तुरंत शुरू भी हो जाए, तब भी निर्धारित समयसीमा तक सभी कार्य पूरे करना मुश्किल माना जा रहा है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया अपना रुख
राजस्थान हाईकोर्ट पहले भी चुनाव में देरी पर चिंता जता चुका है। अदालत ने कहा था कि यदि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आने में समय लग रहा है, तो इसके आधार पर चुनाव को अनिश्चितकाल तक नहीं टाला जा सकता।
कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई तक चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया है।
पहले भी बढ़ चुकी है डेडलाइन
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने पहले पंचायत और निकाय चुनाव 15 अप्रैल तक कराने की समयसीमा तय की थी। बाद में राज्य सरकार के अनुरोध पर अदालत ने अतिरिक्त समय देते हुए नई डेडलाइन 31 जुलाई निर्धारित की।
इसके बावजूद अभी तक चुनावी प्रक्रिया शुरुआती चरण में ही दिखाई दे रही है।
चुनाव का इंतजार कर रहे ग्रामीण और शहरी निकाय
राजस्थान में कई पंचायतों और शहरी निकायों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। चुनाव नहीं होने के कारण स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
अब सभी की निगाहें राज्य निर्वाचन आयोग की अगली अधिसूचना पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि पंचायत और निकाय चुनाव कब आयोजित किए जाएंगे।
