नई दिल्ली.भारत के डीपटेक सेक्टर (AI/ML, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी) में करीब 43% कंपनियों ने बताया कि उनकी एंट्री लेवल भर्तियों में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 0–10% के बीच है।
आवेदन करने वाली महिलाओं की कमी नहीं
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि महिलाओं द्वारा नौकरी के लिए आवेदन करने में कोई खास कमी नहीं है। चौथी तिमाही में 43% महिलाएं सक्रिय रूप से नौकरी तलाश रही थीं, जो पिछली तिमाही के 42% के लगभग बराबर है।
शुरुआत से ही दिखता है जेंडर गैप
डीपटेक सेक्टर में जेंडर गैप करियर की शुरुआत से ही नजर आने लगता है और यह अंतर सीनियर लेवल तक बना रहता है। सर्वे में शामिल किसी भी कंपनी में महिलाओं की हिस्सेदारी 50% से ज्यादा नहीं पाई गई।
भर्ती प्रक्रिया में संरचनात्मक बाधाएं
रिपोर्ट के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया, मूल्यांकन सिस्टम और कार्यस्थल की परिस्थितियां महिलाओं के अवसरों को प्रभावित करती हैं। इससे योग्य उम्मीदवार होने के बावजूद महिलाओं की संख्या कम रह जाती है।
करियर ग्रोथ में भी देरी
करीब 38% कंपनियों ने माना कि महिलाओं को मिड-लेवल तक पहुंचने में पुरुषों की तुलना में ज्यादा समय लगता है।
सैलरी को लेकर अलग-अलग धारणा
करीब 32% कर्मचारियों का मानना है कि समान काम के लिए विपरीत लिंग को ज्यादा वेतन मिलता है। वहीं, 67% कंपनियों का कहना है कि सीनियर स्तर पर जेंडर पे गैप नहीं है, लेकिन 27% कर्मचारियों का मानना है कि यह अंतर बढ़ता है।
स्किल के मुताबिक ऑफर नहीं मिलने की शिकायत
रिपोर्ट में बताया गया कि केवल 42% महिलाओं को लगता है कि उनकी जॉब ऑफर उनके स्किल के अनुसार है।
पारदर्शिता की मांग बढ़ी
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि—
67% लोग सैलरी में पारदर्शिता चाहते हैं
51% लोग प्रमोशन के स्पष्ट नियम चाहते हैं
47% लोग बिना भेदभाव वाली मूल्यांकन प्रक्रिया की मांग करते हैं
नेगोशिएशन में भी अंतर
रिपोर्ट के अनुसार, पुरुष उम्मीदवार सैलरी नेगोशिएशन में ज्यादा सक्रिय होते हैं, जबकि 23% महिलाएं 10% या उससे कम बढ़ोतरी पर भी सहमत हो जाती हैं, जिससे उनकी भविष्य की आय प्रभावित हो सकती है।
