नई दिल्ली. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार संसद में लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा मानसून सत्र के 13 अगस्त को समाप्त होने के बाद सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। यह विशेष सत्र 16 से 18 अगस्त के बीच आयोजित किए जाने की संभावना है। इस दौरान सरकार अपने महत्वाकांक्षी डिलिमिटेशन बिल और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पर चर्चा और आगे की कार्रवाई कर सकती है। हालांकि, विशेष सत्र को लेकर अंतिम निर्णय सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर सामने आना अभी बाकी है।
डिलिमिटेशन बिल पर सरकार की नजर
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार की प्राथमिकता प्रस्तावित डिलिमिटेशन बिल को संसद से पारित कराने की है। इसके लिए संविधान संशोधन विधेयक को सदन में पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश की जा रही है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस विधेयक के समर्थन में पर्याप्त संख्या सुनिश्चित करना है।
बताया जा रहा है कि सरकार मौजूदा मानसून सत्र के दौरान ही इस कानून को दोबारा सदन में लाने को लेकर गंभीर है। यदि सरकार को विधेयक पारित कराने के लिए आवश्यक संख्या का भरोसा हो जाता है, तो मानसून सत्र के बाद विशेष सत्र बुलाकर इस पर चर्चा और मतदान कराया जा सकता है।
महिला आरक्षण विधेयक पर भी हो सकती है चर्चा
प्रस्तावित विशेष सत्र में डिलिमिटेशन के साथ महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधानों पर भी चर्चा होने की संभावना है। डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में सरकार दोनों विषयों को लेकर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश कर सकती है।
विशेष सत्र बुलाने की संभावित योजना ऐसे समय सामने आई है, जब संसद का मानसून सत्र लगातार राजनीतिक गतिरोध का सामना कर रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर टकराव बना हुआ है, जिसके कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई है।
विपक्ष से बातचीत तेज कर रही सरकार
संसद में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने विपक्षी दलों के साथ बातचीत भी तेज कर दी है। बुधवार को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से करीब 50 मिनट तक मुलाकात की। यह बैठक संसद परिसर में राहुल गांधी के कार्यालय में हुई। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी इस बातचीत में मौजूद रहीं।
बैठक को सरकार की ओर से संसद में जारी गतिरोध खत्म करने और विपक्ष के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। रिजिजू ने राहुल गांधी से प्रस्तावित डिलिमिटेशन बिल और Foreign Contribution (Regulation) Act यानी FCRA में प्रस्तावित बदलाव समेत कई महत्वपूर्ण विधायी मुद्दों पर विपक्ष का रुख जानने की कोशिश की।
अमित शाह के बयान पर अड़ा विपक्ष
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि विपक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा नहीं मांग रहा है। विपक्ष की मांग है कि अमित शाह संसद में उस मुद्दे पर बयान दें, जिसके चलते सदन में गतिरोध बना हुआ है।
यह मुद्दा कथित पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई से जुड़ा है। राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा कि इस मामले में गृह मंत्री को सदन में आकर अपनी बात रखनी होगी। सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर सहमति बनने के बाद ही संसद की कार्यवाही सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।
समाजवादी पार्टी समेत अन्य विपक्षी दलों से भी बातचीत
सरकार की ओर से विपक्षी दलों के साथ संपर्क अभियान आगे भी जारी रहने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, अगली बातचीत समाजवादी पार्टी समेत अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के साथ हो सकती है। इसके लिए केंद्रीय मंत्रियों प्रह्लाद जोशी, पीयूष गोयल, अर्जुन राम मेघवाल और एल. मुरुगन को अलग-अलग विपक्षी दलों से संपर्क करने की जिम्मेदारी दी गई है।
इन मंत्रियों के विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं के साथ अलग-अलग बातचीत करने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य प्रस्तावित विधेयकों पर दलों की स्थिति समझना और संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए किसी तरह की सहमति बनाने की संभावनाएं तलाशना है।
दो-तिहाई बहुमत जुटाना सरकार के लिए अहम
डिलिमिटेशन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होगी। ऐसे में सरकार के लिए केवल संख्या बल जुटाना ही नहीं, बल्कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाना भी महत्वपूर्ण होगा।
यदि सरकार आवश्यक समर्थन हासिल करने में सफल रहती है, तो 16 से 18 अगस्त के बीच प्रस्तावित विशेष सत्र में विधेयक को चर्चा के लिए लाया जा सकता है। फिलहाल यह योजना सूत्रों के हवाले से सामने आई है और विशेष सत्र की तारीख तथा एजेंडा को लेकर अंतिम आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच होने वाली बैठकों से यह साफ हो सकता है कि संसद में जारी गतिरोध खत्म होता है या नहीं और डिलिमिटेशन बिल को लेकर सरकार आगे क्या रणनीति अपनाती है।

