धर्मशाला-मैक्लोडगंज रोपवे परियोजना को मिली हरी झंडी

अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी धर्मशाला में अब पर्यटन को पंख लगेंगे. केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने धर्मशाला-मैक्लोडगंज रोपवे परियोजना को अंतिम स्वीकृति प्रदान कर दी है. 144.9 करोड़ रुपये से बनने वाली इस परियोजना का मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जनवरी 2016 में शीतकालीन प्रवास के दौरान शिलान्यास किया था. हालांकि फोरेस्ट कंजरवेशन एक्ट (एफसीए) के तहत मंजूरी पहले ही मिल चुकी थी, लेकिन इसके बाद कुछ धनराशि संबंधित  समस्या के कारण अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी रह गई थी,लेकिन अब स्वीकृति मिलने के बाद धर्मशाला-मैक्लोडगंज रोपवे का रास्ता साफ हो गया है.
रोपवे परियोजना दो किलोमीटर की होगी और इससे पर्यटक आसानी से धर्मशाला के बाद मैक्लोडगंज पहुंच पाएंगे.धर्मशाला-मैक्लोडगंज रोप-वे के निर्धारित रूट में 498 पेड़ चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें काटा जाना है. वन विभाग का प्रयास था कि कम से पेड़ काटे जाए, जिसके चलते कई जगहों पर रोप-वे के रूट को बदला भी गया है.
रोपवे परियोजना के अंतर्गत टिकट काउंटर, प्रतीक्षा कक्ष, शौचालय सुविधा,आपातकालीन उपचार कक्ष की भी सुविधा सुविधाओं का खास ख्याल रखा गया है. निर्माणाधीन कंपनी को निर्देश भी दिए गए हैं कि जहां से परियोजना का निर्माण होना है, वहां पार्किंग के साथ-साथ ट्रॉली सिस्टम का भी प्रावधान करना हो.
धर्मशाला के मैक्लोडगंज में तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा की शरणस्थली है और यहां हर वर्ष देश से ही नहीं विदेश से भी हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. परियोजना के निर्माण से उन्हें धर्मशाला से मैक्लोडगंज पहुंचने के लिए अब आधे घंटे का सफर किसी वाहन में नहीं करना होगा.
डीएफओ धर्मशाला प्रवीण ठाकुर ने बताया की धर्मशाला-मैक्लोडगंज रोप-वे को केंद्र सरकार की ओर से एक जून को अंतिम स्वीकृति मिल गई है. उन्होंने बताया की इस प्रोजेक्ट के निर्माण के चलते 498 पेड़ काटने की स्वीकृति वकायदा केंद्र सरकार ने दे दी है जिसके चलते कटने वाले पेड़ों को काटने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. ठाकुर ने बताया की यह कार्य वन निगम के माध्यम से किया जाएगा और इसी सप्ताह वे इस कार्य को पूरा कर लेंगे उन्होंने बताया की जैसे ही पेड़ कटान का कार्य पूरा हो जाएगा उसके बाद तुरंत जो कंपनी इस कार्य को करने जा रही है इस कार्य को शुरू कर देगी.