नई दिल्ली. 2026 के बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों से पहले विपक्षी दलों में हुए बंटवारे का सीधा लाभ सत्तारूढ़ भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को मिला। महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) के उम्मीदवार-वार मतदान आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आया है कि कम से कम 32 वार्डों में विपक्षी वोटों के विभाजन ने नतीजों की दिशा बदल दी। इनमें 21 वार्ड भाजपा और 10 वार्ड शिंदे सेना ने जीते, जबकि एक वार्ड में अजित पवार गुट की एनसीपी को फायदा हुआ।
यह वोट बंटवारा शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के बीच गठबंधन टूटने के बाद देखने को मिला। उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे की एमएनएस से हाथ मिलाया, जबकि कांग्रेस ने अलग राह पकड़ते हुए प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) से गठबंधन किया। समन्वय की कमी का असर कई वार्डों में सीटों के नुकसान के रूप में दिखा।
कांग्रेस की शीतल म्हात्रे को 2,474 वोटों से हराया
दहिसर वेस्ट के वार्ड नंबर 1 में शिंदे सेना के रेखा यादव ने कांग्रेस की शीतल म्हात्रे को 2,474 वोटों से हराया। यहां UBT उम्मीदवार फोरम परमार तीसरे स्थान पर रहीं, जिससे विपक्षी वोट बंटे। अंधेरी वेस्ट के वार्ड 63 में भाजपा के रूपेश सावरकर ने UBT के देवेंद्र अंबरकर को मात्र 538 वोटों से हराया, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रियंका सनप को 4,380 वोट मिले।
घाटकोपर के वार्ड 129 में भाजपा की अश्विनी माते ने जीत दर्ज की, जहां एमएनएस और कांग्रेस के उम्मीदवारों को भी बड़ी संख्या में वोट मिले। इसी तरह घाटकोपर ईस्ट के वार्ड 133 में शिंदे सेना की निर्मिति कांदे को VBA और एमएनएस के बीच बंटे वोटों का फायदा मिला। बांद्रा ईस्ट के वार्ड 96 में एनसीपी की आयशा खान की जीत में भी विपक्षी विभाजन अहम रहा।
कुछ वार्डों में ‘फ्रेंडली फाइट’ भी नुकसानदेह साबित हुई। वार्ड 173 और 225 में शिंदे सेना के उम्मीदवारों के कारण वोट बंटे और UBT को भाजपा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर NOTA और छोटे दलों को मिले वोट भी निर्णायक बने।
नतीजों के बाद उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस को 24 सीटें जीतने पर बधाई दी, लेकिन गठबंधन टूटने से नुकसान हुआ या नहीं—इस सवाल पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा, “राजनीति में अगर-मगर पर बात नहीं की जा सकती।”
