नई दिल्ली. तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बहुमत साबित करने के लिए जरूरी 118 विधायकों के आंकड़े तक पहुंचने को लेकर विभिन्न दलों के बीच लगातार बातचीत जारी है। सरकार गठन में हो रही देरी के बीच राज्य की राजनीति में असमंजस की स्थिति बनी हुई है और सभी की नजरें छोटे दलों के फैसले पर टिकी हैं।
DMK और AIADMK ने की विधायक दल की बैठक
DMK और AIADMK ने बुधवार को अपने नव निर्वाचित विधायकों की बैठक आयोजित की। इस दौरान राजनीतिक रणनीति और बहुमत साबित करने के मुद्दे पर चर्चा हुई। वहीं AIADMK के महासचिव Edappadi K. Palaniswami को विधायक दल का नेता चुना गया।
VCK और वाम दलों की बैठक पर टिकी नजरें
सरकार गठन की दिशा तय करने में अब Viduthalai Chiruthaigal Katchi, Communist Party of India और Communist Party of India (Marxist) की भूमिका अहम मानी जा रही है। इन दलों के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक आज होने जा रही है, जिसमें सबसे बड़ी पार्टी TVK को समर्थन देने के मुद्दे पर फैसला लिया जा सकता है।
राज्यपाल के फैसले पर राजनीतिक बयानबाजी तेज
राज्यपाल Vishwanath Arlekar द्वारा बहुमत साबित करने को लेकर दिए गए निर्देश के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। DMK प्रवक्ता T. K. S. Elangovan ने कहा कि सबसे बड़ी पार्टी का कर्तव्य है कि वह अपना बहुमत साबित करे। उन्होंने कहा कि DMK प्रमुख M. K. Stalin किसी तरह का संवैधानिक संकट नहीं चाहते।
AIADMK ने राज्यपाल के फैसले का किया समर्थन
वहीं पुडुचेरी AIADMK सचिव A. Anbazhagan ने विधायक दल की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि अंतिम फैसला पार्टी महासचिव को लेने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने राज्यपाल के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि मौजूदा राजनीतिक अनिश्चितता के बीच अप्रत्याशित फैसले भी सामने आ सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व को स्टालिन की चुनावी हार पर दुख है। तमिलनाडु में फिलहाल सरकार गठन की तस्वीर पूरी तरह राजनीतिक समीकरणों और छोटे दलों के समर्थन पर निर्भर दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में VCK और वाम दलों का रुख राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
