लोकतंत्र के महापर्व में सबसे जरूरी हैं आप, इसलिए करें मतदान

नई दिल्ली. हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 की पूर्णाहुति गुरुवार को हो जाएगी. स्टार प्रचारकों की रैलियां थम चुकी हैं, प्रत्याशी आखिरी जोड़-तोड़ में लगे हुए हैं, पार्टी कार्यालयों में बूथ कमेटियों का सामान रवाना किया जा रहा है. आगामी 9 नवम्बर के दिन प्रदेश की बालिग जनता, अपनी 13वीं विधानसभा के सदस्यों का चुनाव करने जा रही है. मतदान हर नागरिक का अधिकार है, पर आइये बात करते हैं उन वजहों की जिनके चलते इस बार मतदान करना एक जरूरी दायित्व भी बन जाता है…

लोकतंत्र में जरुरी है अपना कर्तव्य निभाना

लोकतंत्र की मूल भावना जनता पर आधारित है. इसीलिए इसमें जनता को जनार्दन भी कहा जाता है. मतदान आपका अधिकार है तो साथ ही कर्तव्य भी, और दोनों साथ-साथ ही आते हैं. जनता के रूप में आप अव्यवस्थाओं की शिकायत नहीं कर सकते अगर आप वोट नहीं करते हैं.

देश में इन दिनों ‘राइट टु रिकॉल’ की बहस ने भी जोर पकड़ा है. मगर बड़ा सवाल यह है कि जब जनता वोटिंग के प्रति ही जागरूक नहीं तो क्या सरकारों को वापस बुलाने के अधिकार का सही ढंग से उपयोग कर पाएगी.

भारत के पहले वोटर का राज्य

हिमाचल प्रदेश देश के पहले वोटर का राज्य है. आज़ादी के बाद होने वाले पहले आम चुनावों में राज्य के किन्नौर क्षेत्र के श्याम शरण नेगी को भारत का पहला वोटर बनने का गौरव हासिल हुआ था. आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहाँ के चुनाव दुनिया भर में प्रजातान्त्रिक शक्ति हस्तांतरण का सबसे मजबूत और अनोखा उदाहरण प्रस्तुत करते हैं. भारत के साथ साथ आजाद होने वाले तमाम देश सैनिक तानाशाही के दौर से गुज़र चुके हैं पर हमारे यहां लोकतंत्र की धारा निर्बाध गति से बह रही है. जो प्रक्रिया आज विश्व भर के लोगों के आश्चर्य और प्रशंसा का केंद्र बन चुकी है उसका पहला भागीदार भी देवभूमि हिमाचल से ही था.

राज्य चुनाव आयोग और कर्मचारियों ने की है कमरतोड़ मेहनत 

इन चुनावों में नेताओं और प्रत्याशियों से ज्यादा मेहनत तो चुनाव आयोग ने की है. दूरस्थ स्थानों पर चुनाव कराने की जिम्मेदारी जिन कर्मचारियों को दी गयी है उनमें से कुछ तो 7 तारीख को ही अपने पोलिंग बूथों की और रवाना हो गए हैं और 10 तारीख तक ही वे वापस अपने घर जा पाएंगे. राजधानी शिमला के सबसे दूरस्थ मतदान केंद्र पंडार गांव में जाने के लिए पांच कर्मचारी अपनी पीठों पर मतदान का सामान और मशीनें लाद कर 14 किलोमीटर की चढ़ाई चढ़ कर पहुचेंगे. वहीं कांगड़ा की बैजनाथ विधानसभा के बड़ा भंगाल क्षेत्र में लगभग १०० वोटरों के लिए चुनाव आयोग की टीम को हेलीकाप्टर से पहुंचना था, मौसम खराब होने की वजह से अब 7 लोगाें की टीम 22 किमी चढ़ाई कर यहां पहुंचेगी. कुल्लू जिले के शाक्टी मतदान केंद्र में वोटिंग मशीनें चलाने के लिए सोलर पैनल का इस्तेमाल किया जायेगा, क्यूंकि यहां बिजली की समस्या है. 17 हज़ार जवानों और 65 कंपनी अर्धसैनिक बल के अलावा कुल 37,605 कर्मचारी रात दिन एक करके, प्रदेश की दुर्गमतम जगहों पर पहुंचकर अपना काम कर रहे हैं, ताकि एक भी वोटर अपने मताधिकार के प्रयोग से वंचित न रह जाये. ऐसे में, हमारा भी फर्ज है कि लगभग दरवाजे तक आ पहुंची व्यवस्था का उपयोग करें और मतदान करें.

ब्रेल लिपि में होंगी दृष्टिहीन वोटरों की मतदाता पर्चियां 

इस बार के चुनावों में राज्य चुनाव आयोग ने दृष्टिहीन मतदाताओं का खास ख्याल रखा है. दृष्टि बाधित मतदाताओं को दी जाने वाली पर्चियां इस बार ब्रेल लिपि में होंगी, ताकि उनपर दर्ज जानकारी को पढने के लिए इन वोटरों को किसी की सहायता की जरुरत न पड़े.

 तोड़ना है पुराना रिकॉर्ड

1998 के चुनाव में हिमाचल प्रदेश में अधिकतम, 66.32 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. उसके बाद के चुनावों में मत प्रतिशत उससे ऊपर नहीं जा पाया. हाल ही में हुए 2014 लोकसभा चुनावों के दौरान मत प्रतिशत बढा तो था पर 65.18 पर आकर अटक गया. पहले के मुकाबले राज्य में शिक्षा और जागरूकता तो बढ़ी है, यातायात के साधन और सड़कों की स्थितियों में भी सुधार हुआ है, पर लोकतान्त्रिक सहभागिता उस अनुपात में नहीं बढ़ी. ऐसे में राज्य के वोटरों पर दायित्व है अपने पुराने रिकॉर्ड को तोड़कर एक नया कीर्तिमान बनाने का.

पहली बार देख सकेंगे अपना वोट

हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है जहां पूरा चुनाव VVPAT के कराया जा रहा है. VVPAT यानी ‘वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल’ एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में बटन दबाने के बाद, मतदाता का वोट एक कागज़ पर रिकॉर्ड हो जाता है, जिसे वह साथ लगी मशीन के डिस्प्ले में देख सकता है. हालिया चुनावों में EVM से छेड़छाड़ के आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने इस व्यवस्था के उपयोग का मन बना लिया था. गोवा चुनाव के दौरान भी VVPAT का प्रयोग हुआ था लेकिन उस दौरान ऑडिट ट्रेल की पर्चियों की गिनती नहीं की गयी थी, जो इस बार की जाएगी.

साथ ही साथ, इस बार कई ऐसे बूथ भी होंगे जो पूरी तरह महिला मतदानकर्मियों या दिव्यांग मतदान कर्मियों के हवाले होंगे.