नई दिल्ली. Rahul Gandhi vs Election Commission: देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा टकराव देखने को मिला है। कांग्रेस नेता और Leader of Opposition in Lok Sabha राहुल गांधी ने चुनाव आयोग (ECI) पर सीधे तौर पर Vote Theft (वोट चोरी) में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया। लेकिन अब Election Commission of India ने इन दावों को पूरी तरह “unfounded and irresponsible” बताते हुए खारिज कर दिया है।
क्या कहा चुनाव आयोग ने?
ECI Statement में कहा गया, “हर दिन इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन चुनाव आयोग अपनी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ काम करता रहेगा। सभी चुनाव अधिकारियों से अनुरोध है कि वे इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों को नजरअंदाज करें और अपने कार्य को निष्पक्षता से करते रहें।”
राहुल गांधी का बड़ा दावा: ‘हमारे पास 100% सबूत हैं’
राहुल गांधी ने हाल ही में एक प्रेस मीट में कहा, “Vote stealing is happening. हमारे पास इसके 100 प्रतिशत स्पष्ट और अकाट्य सबूत हैं कि Election Commission is complicit. यह आरोप हमने सोच-समझकर लगाया है और जब हम ये सबूत सार्वजनिक करेंगे, तो पूरा देश देखेगा कि EC कैसे BJP को फायदा पहुंचा रहा है।”
उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव आयोग से अपेक्षित सहयोग न मिलने पर कांग्रेस पार्टी ने independent investigation कराई, जो करीब 6 महीने चली। राहुल के मुताबिक, जो खुलासा हुआ है वो “nuclear bomb” जैसा है।
उनका कहना है, “जब ये बम फटेगा, तो ECI को देश में कहीं छुपने की जगह नहीं मिलेगी।”
आरोपों की जड़: बिहार की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग द्वारा बिहार में चलाए जा रहे Special Intensive Revision (SIR) अभियान को निशाना बनाते हुए आरोप लगाया कि यह BJP को electoral advantage देने की एक कोशिश है। उन्होंने दावा किया कि वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर manipulation किया गया है।
कांग्रेस की स्वतंत्र जांच बनाम चुनाव आयोग की पारदर्शिता
कांग्रेस का कहना है कि उनकी टीम ने व्यापक स्तर पर डेटा जुटाया और जांच की। राहुल गांधी का दावा है कि उनका रिपोर्ट पब्लिक होते ही चुनाव प्रक्रिया पर आम जनता का विश्वास seriously shaken हो जाएगा। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि वह किसी भी राजनीतिक दबाव के बिना transparent और fair electoral process सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
ECI vs Rahul Gandhi controversy ने भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनावी संस्थानों की साख पर एक नई बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां राहुल गांधी का दावा है कि electoral system is compromised, वहीं चुनाव आयोग अपने रुख पर अडिग है कि वो निष्पक्षता से काम कर रहा है।
आगामी दिनों में अगर कांग्रेस अपना तथाकथित ‘परमाणु बम’ सबूतों के साथ पेश करती है, तो इससे देश की चुनावी प्रक्रिया पर बड़ा असर पड़ सकता है। फिलहाल, सबकी निगाहें इस राजनीतिक और संवैधानिक संघर्ष पर टिकी हैं।
