नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने संयुक्त रूप से “Extreme Heat and Agriculture” शीर्षक से एक नई रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में लगातार बढ़ता तापमान और अत्यधिक गर्मी कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती गर्मी के कारण खाद्य उत्पादन में कमी आ रही है और कृषि पर निर्भर करोड़ों लोगों की आय भी प्रभावित हो रही है। दुनिया में लगभग 1.23 अरब लोग ऐसे हैं, जिनकी आजीविका कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है और वे इस संकट का सबसे अधिक सामना कर रहे हैं।
सूखे के साथ बढ़ेगा नुकसान कई गुना
रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि अत्यधिक गर्मी के साथ सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाएं भी जुड़ जाएं, तो फसलों को होने वाला नुकसान तीन गुना तक बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया का तापमान लगातार बढ़ रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में कृषि उत्पादन पर इसका असर और अधिक गंभीर हो सकता है।
खाद्य सुरक्षा के लिए उभर रहा बड़ा खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक गर्मी अब कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर लेकिन कम समझे जाने वाले खतरों में से एक बन चुकी है।
बढ़ते तापमान, लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव और मौसम के बदलते पैटर्न का असर सीधे खेती पर पड़ रहा है। इससे फसलों की पैदावार कम हो रही है, पशुओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता भी घट रही है।
ग्रामीण आजीविका पर भी पड़ रहा असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती गर्मी का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।
छोटे और सीमांत किसान, खेतिहर मजदूर और कमजोर आर्थिक वर्ग इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इनके पास जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर पर सीधा असर पड़ रहा है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत
FAO और WMO ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन का असर आने वाले वर्षों में खाद्य उत्पादन और वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर और गंभीर हो सकता है।
रिपोर्ट में सरकारों और नीति निर्माताओं से कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और किसानों को आधुनिक तकनीकों तथा बेहतर संसाधनों से जोड़ने पर जोर दिया गया है, ताकि भविष्य में बढ़ती गर्मी के असर को कम किया जा सके।
