नई दिल्ली. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जयपुर में आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के बाद बड़ा ऐलान किया है। अब पूरे देश को 5 अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में बांटा जाएगा और हर राज्य के लिए अलग कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे हर राज्य की जलवायु, मिट्टी, पानी और संसाधनों के हिसाब से खेती की योजना बनेगी और किसानों को सही फसल, सही बीज और सही तकनीक का लाभ मिलेगा।
इसके साथ ही सभी किसानों को Farmer ID से जोड़ा जाएगा, जिससे खाद, बीज, फसल बीमा, मुआवजा और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचेगा।
देश को 5 कृषि-जलवायु जोन में बांटेगी सरकार
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह देश का पहला ऐसा रीजनल एग्रीकल्चर कॉन्फ्रेंस है, जिसमें ICAR के वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान, FPOs, NAFED, NCCF और बीज से लेकर बाजार तक जुड़े संस्थान एक मंच पर आए। उन्होंने बताया कि पहले खरीफ और रबी के लिए केवल एक राष्ट्रीय स्तर की बैठक होती थी, जिसमें विस्तार से चर्चा नहीं हो पाती थी। अब सरकार ने फैसला किया है कि:
नई योजना के तहत क्या होगा?
देश को 5 एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में बांटा जाएगा
5 क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे
हर राज्य के लिए अलग कृषि रोडमैप बनेगा
खेती का मॉडल राज्य की मिट्टी, पानी, मौसम और संसाधनों के हिसाब से तय होगा
यह तय किया जाएगा कि किस क्षेत्र में कौन-सी फसल, किस किस्म और किस तकनीक से सबसे बेहतर उत्पादन होगा
Farmer ID बनेगी किसानों के लिए ‘वन नेशन, वन एग्रीकल्चर पहचान’
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि Farmer ID बनाने का काम तेजी से चल रहा है और सरकार को उम्मीद है कि अगले लगभग 3 महीने में सभी किसानों की एकीकृत पहचान तैयार हो जाएगी।
Farmer ID से किसानों को क्या फायदा होगा?
खाद, बीज और अन्य इनपुट का सही और लक्षित वितरण
फसल बीमा का लाभ सीधे मिलेगा
फसल नुकसान का मुआवजा जल्दी मिलेगा
सभी सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे किसान तक पहुंचेगा
फर्जी खाद-बीज और कालाबाजारी पर रोक लगेगी
खाद वितरण में बड़ा बदलाव
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्य प्रदेश में Farmer ID आधारित खाद वितरण मॉडल लागू किया गया है और अब इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।
इस सिस्टम में:
किसानों को लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा
उन्हें जमीन और फसल की जरूरत के हिसाब से खाद मिलेगी
बटाईदार/किरायेदार किसान भी जमीन मालिक की सहमति से इसका लाभ ले सकेंगे
National Edible Oil Mission: तिलहन उत्पादन में रिकॉर्ड, अब 69.7 मिलियन टन का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–तिलहन (National Edible Oil Mission–Oilseeds) के तहत देश ने 2024-25 में रिकॉर्ड 429.89 लाख टन तिलहन उत्पादन हासिल किया है।
यह उत्पादन 2023-24 के 396.69 लाख टन से काफी ज्यादा है।
तिलहन उत्पादकता में भी सुधार
2023-24: 1314 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
2024-25: 1412 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
सरकार का मानना है कि सही नीति, उन्नत बीज, तकनीक और प्रोत्साहन के जरिए भारत खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
Oilseeds Mission के तहत क्या-क्या बड़े लक्ष्य तय हुए?
सरकार ने तिलहन क्षेत्र में बड़े विस्तार का लक्ष्य रखा है।
मुख्य लक्ष्य
कुल क्षेत्रफल: 29 मिलियन हेक्टेयर से बढ़ाकर 33 मिलियन हेक्टेयर
उत्पादकता: 1353 किलोग्राम/हेक्टेयर से बढ़ाकर 2112 किलोग्राम/हेक्टेयर
उत्पादन: 39.2 मिलियन टन से बढ़ाकर 69.7 मिलियन टन
सरकार ने कितनी राशि रखी?
इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ₹10,103 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
किसानों को किन-किन क्षेत्रों में मदद मिलेगी?
उन्नत तकनीक
बेहतर बीज
सिंचाई
प्रोसेसिंग
मार्केटिंग
इससे न सिर्फ खाद्य तेल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी।
तिलहन मिशन में वैल्यू चेन को भी मजबूत कर रही सरकार
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 2025-26 में 13.35 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को तिलहन खेती के दायरे में लाया गया है।
अब तक की बड़ी उपलब्धियां
1,076 वैल्यू चेन क्लस्टर बनाए गए
60 सीड सेंटर स्थापित किए गए
50 बीज भंडारण इकाइयों को मंजूरी मिली
400 ऑयल मिल स्थापित हो चुकी हैं
कुल 800 ऑयल मिल स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है
इसका उद्देश्य है कि उत्पादन से प्रोसेसिंग और मार्केटिंग तक पूरी चेन मजबूत हो।
Pulses Mission: दालों में आत्मनिर्भरता के लिए सरकार का बड़ा प्लान
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि Pulses Mission के तहत देश को दालों में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार किन बातों पर जोर दे रही है?
ज्यादा से ज्यादा बीज उत्पादन
दल मिलों की स्थापना
नई किस्मों को तेजी से सीड चेन में शामिल करना
किसानों से 100% खरीद (Procurement)
दालों के बीज उत्पादन पर किसानों को मिलेगी आर्थिक मदद
सरकार ने दालों के बेहतर बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है।
बीज उत्पादन पर सहायता
अरहर (Tur): ₹4,500 प्रति क्विंटल
उड़द/तुर: ₹2,000 प्रति क्विंटल
चना (Gram): ₹1,800 प्रति क्विंटल
इसका मकसद किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना है।
राज्यवार बीज वितरण लक्ष्य भी तय
सरकार ने सब्सिडी वाले बीज वितरण के लिए राज्यों के लक्ष्य भी तय किए हैं।
राज्यवार लक्ष्य
मध्य प्रदेश: 3,10,870 क्विंटल
राजस्थान: 2,45,000 क्विंटल
महाराष्ट्र: 87,500 क्विंटल
गुजरात: 40,000 क्विंटल
नई दाल किस्मों को तेजी से किसानों तक पहुंचाने की तैयारी
सरकार अब नई उन्नत किस्मों को जल्दी से जल्दी किसानों तक पहुंचाना चाहती है।
राज्यों में चिन्हित नई किस्में
राजस्थान: 79 किस्में
गुजरात: 58 किस्में
मध्य प्रदेश: 63 किस्में
महाराष्ट्र: 58 किस्में
देश के 60% से ज्यादा दाल उत्पादन वाले राज्यों पर खास फोकस
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात मिलकर देश के 60% से अधिक दाल उत्पादन में योगदान देते हैं।
कुछ मॉडल जिले भी चुने गए
नर्मदापुरम (मध्य प्रदेश)
झालावाड़ और टोंक (राजस्थान)
गडचिरोली (महाराष्ट्र)
जूनागढ़ (गुजरात)
इन जिलों को मॉडल पल्सेस डिस्ट्रिक्ट के रूप में विकसित किया जाएगा। वहीं, जहां उत्पादकता कम है, वहां विशेष योजना बनाकर उत्पादन बढ़ाया जाएगा।
दाल मिल नेटवर्क का तेजी से विस्तार
सरकार दालों की प्रोसेसिंग मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर दल मिल नेटवर्क विकसित कर रही है।
राज्यवार दल मिलें
मध्य प्रदेश: 55
महाराष्ट्र: 34
गुजरात: 28
राजस्थान: 30
गोवा: 5
Pulses Mission के लिए राज्यों को कितना बजट मिला?
2026-27 के लिए सरकार ने Pulses Mission के तहत राज्यों को बजट भी आवंटित किया है।
राज्यवार आवंटन
मध्य प्रदेश: ₹344 करोड़
राजस्थान: ₹312 करोड़
महाराष्ट्र: ₹166 करोड़
गुजरात: ₹31 करोड़
अब किसानों से MSP पर होगी 100% खरीद
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने अरहर, उड़द और मसूर की MSP पर 100% खरीद का प्रावधान किया है।
इसका क्या फायदा होगा?
किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी
आय सुरक्षा मजबूत होगी
दालों की खेती को बढ़ावा मिलेगा
गेहूं-धान की तरह किसानों को भरोसेमंद बाजार मिलेगा
Viksit Krishi Sankalp Abhiyan: अब ‘Lab to Land’ मॉडल पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान को अब राज्यवार कृषि-जलवायु स्थितियों और फसल चक्र के हिसाब से लागू किया जाएगा।
इस अभियान में कौन करेगा काम?
16,000 वैज्ञानिक
ICAR संस्थान
कृषि विश्वविद्यालय
कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)
ये सभी मिलकर ‘Lab to Land’ मॉडल के तहत सीधे किसानों के साथ काम करेंगे।
छोटी जोत वाले किसानों के लिए Integrated Farming Model पर फोकस
सरकार ने कहा कि छोटी जमीन वाले किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसमें क्या-क्या शामिल होगा?
फसल उत्पादन
फल और सब्जियां
औषधीय पौधे
पशुपालन
मधुमक्खी पालन
मत्स्य पालन
बकरी पालन
एग्रोफॉरेस्ट्री
इस मॉडल का उद्देश्य है कि किसान एक ही जमीन से कई स्रोतों से कमाई कर सकें।
Natural Farming और Organic Certification पर भी सरकार का जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार अब:
प्राकृतिक खेती को तेज गति से बढ़ावा देगी
मिट्टी की सेहत को सुरक्षित रखेगी
किसानों को ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन के जरिए प्रीमियम मार्केट से जोड़ने की दिशा में काम करेगी
फर्जी खाद-बीज और कीटनाशकों पर सख्त कार्रवाई
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार ने फर्जी खाद, नकली बीज और कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
अब तक क्या कार्रवाई हुई?
कई फैक्ट्रियां सील की गईं
सप्लाई चेन ट्रैकिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है
उत्पादन से डिलीवरी तक पूरी निगरानी होगी
उन्होंने कहा कि मौजूदा 1968 का कानून कमजोर है, इसलिए अब सरकार कड़े कानून या संशोधन लाने की तैयारी में है।
Satellite से होगा फसल नुकसान का आकलन
सरकार अब सैटेलाइट आधारित रिमोट सेंसिंग से फसल नुकसान का वैज्ञानिक आकलन करने की दिशा में काम कर रही है।
इससे क्या फायदा होगा?
राज्य सरकारें SDRF (RBC 6(4)) के तहत राहत जल्दी दे सकेंगी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दावों का निपटारा तेज होगा
Farmer ID के जरिए भुगतान सीधे किसानों तक पहुंचेगा
रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक संकट पर सरकार की नजर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संकट खाद और कृषि इनपुट पर असर डालते हैं, लेकिन केंद्र सरकार किसानों पर इसका असर कम से कम रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
फिलहाल क्या स्थिति है?
खरीफ और रबी दोनों सीजन के लिए पर्याप्त खाद उपलब्ध है
सरकार इनपुट सप्लाई को स्थिर बनाए रखने पर काम कर रही है
आलू, प्याज और टमाटर (APT) किसानों के लिए भी राहत
सरकार ने APT (आलू, प्याज, टमाटर) जैसी फसलों में डिस्ट्रेस सेल रोकने के लिए भी बड़ा कदम उठाया है।
नई व्यवस्था क्या होगी?
राज्य सरकारें किसानों से सीधी खरीद करेंगी
फसल को बड़े शहरों में सप्लाई किया जाएगा
परिवहन और भंडारण लागत केंद्र सरकार उठाएगी
इससे क्या होगा?
किसानों को उचित दाम मिलेगा
उपभोक्ताओं को वाजिब कीमत पर उत्पाद मिलेंगे
राज्यों को जरूरत के हिसाब से मिलेगी फंडिंग
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को एक जैसी योजना नहीं थोपेगी, बल्कि उनकी जरूरत के अनुसार लचीली फंडिंग उपलब्ध कराएगी।
किन क्षेत्रों में राज्यों को मदद मिलेगी?
ड्रिप इरिगेशन
मशीनीकरण
प्रोसेसिंग
वैल्यू एडिशन
स्टोरेज इससे संसाधन वहीं लगाए जाएंगे जहां उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होगी।
खेती के लिए ‘वन-साइज़-फिट्स-ऑल’ मॉडल खत्म
केंद्र सरकार की यह नई रणनीति साफ संकेत देती है कि अब खेती में एक जैसा मॉडल पूरे देश पर लागू नहीं होगा। अब राज्यवार और क्षेत्रवार खेती की योजना, Farmer ID आधारित पारदर्शी वितरण, तिलहन और दालों में आत्मनिर्भरता, नकली इनपुट पर सख्ती, और इंटीग्रेटेड फार्मिंग जैसे कदम आने वाले समय में भारतीय कृषि को नई दिशा दे सकते हैं।
