नई दिल्ली. देश में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए Ministry of Finance की व्यय वित्त समिति (EFC) ने 5,500 करोड़ रुपये की फ्लोटिंग सोलर बैटरी स्टोरेज योजना को मंजूरी दे दी है। अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास भेजा जाएगा।
फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं को मिलेगा बढ़ावा
इस योजना का उद्देश्य राज्यों और संबंधित एजेंसियों को फ्लोटिंग सोलर पैनल तथा बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है। फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं जलाशयों और जल निकायों पर स्थापित की जाती हैं, जिससे:
जमीन की आवश्यकता कम होती है
सोलर उत्पादन क्षमता बेहतर होती है
स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलता है
पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ी ऊर्जा सुरक्षा की चिंता
सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
भारत अब जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर तेजी से काम कर रहा है।
बैटरी स्टोरेज को माना गया अहम
अधिकारियों के अनुसार बैटरी स्टोरेज सिस्टम नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे अतिरिक्त सौर ऊर्जा को स्टोर किया जा सकेगा और जरूरत के समय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। यह व्यवस्था बिजली ग्रिड की स्थिरता बढ़ाने में भी मदद करेगी।
MNRE ने मांगे थे 6,700 करोड़ रुपये
सूत्रों के मुताबिक Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) ने इस योजना के लिए 6,700 करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन EFC ने 5,500 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी।
समिति ने मंत्रालय को प्रोत्साहन मॉडल के कुछ हिस्सों में संशोधन और सुधार करने का भी निर्देश दिया है।
स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य हासिल करने में मिलेगी मदद
यह योजना भारत के बड़े स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप मानी जा रही है।
सरकार का मानना है कि इससे:
हरित ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा
बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर होगी
आयातित ईंधन पर निर्भरता घटेगी
ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक सुरक्षा मजबूत होगी।
