नई दिल्ली. मखाना, जिसे वैज्ञानिक रूप से Euryale ferox कहा जाता है, भारत की पारंपरिक जलीय फसलों में शामिल है। इसकी खेती मुख्य रूप से उथले तालाबों, झीलों और आर्द्रभूमि वाले क्षेत्रों में की जाती है। पौधे के बीज को प्रोसेस और भूनने के बाद फुलाकर तैयार किया जाता है, जिसे आमतौर पर Fox Nut के रूप में खाया जाता है। भारत आज दुनिया में मखाना उत्पादन में अग्रणी है। बिहार, पश्चिम बंगाल और असम इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं, जहां लंबे समय से इसकी खेती की जाती रही है।
बिहार का पारंपरिक खाद्य माना जाने वाला मखाना अब देशभर में एक Healthy Snack और Superfood के रूप में लोकप्रिय हो रहा है। बढ़ती Health Awareness, बदलती खान-पान की आदतों, नए Startups और Value-Added Products ने इस क्षेत्र को नई गति दी है। इसके साथ ही Farmer Producer Organizations यानी FPOs की भूमिका भी बढ़ी है।
National Makhana Board से सेक्टर को मिली नई दिशा
केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में मखाना क्षेत्र की प्रमुख संपत्तियों पर नजर रखते हुए राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना करने की घोषणा की थी। इसके बाद 15 सितंबर 2025 को बिहार में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य खाना उत्पाद से लेकर प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत और आधुनिक बनाना है।
सरकार ने मखाना क्षेत्र के विकास के लिए Central Sector Scheme for Development of Makhana को भी मंजूरी दी है। इस योजना पर 2025-26 से 2030-31 तक कुल 476.03 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत Quality Seeds, Research and Innovation, Farmer Training, Harvesting और Post-Harvest Management को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही Value Addition, Branding, Marketing, Exports और Quality Control को मजबूत करने पर भी जोर रहेगा। वर्ष 2025-26 के लिए 30 करोड़ रुपये और 2026-27 के लिए 90 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
देश के मखाना उत्पादन में बिहार की बड़ी हिस्सेदारी
भारत वैश्विक मखाना उत्पादन में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है। देश के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी करीब तीन-चौथाई है और वैश्विक आपूर्ति में राज्य का योगदान लगभग 80 से 85 प्रतिशत बताया जाता है। बिहार में मखाना की खेती मुख्य रूप से उत्तर बिहार में होती है।
कोसी क्षेत्र के सुपौल, सहरसा और मधेपुरा के अलावा मिथिला और सीमांचल के आसपास के क्षेत्रों में इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यही वजह है कि बिहार को भारत के Makhana Hub के रूप में देखा जाता है।
Horticulture Statistics Unit के अंतिम अनुमान के अनुसार, 2024-25 में भारत में मखाना उत्पादन 63,910 Metric Tonnes रहा, जबकि औसत उत्पादकता 2.03 MT प्रति हेक्टेयर थी। वहीं 2025-26 के Second Advance Estimates के अनुसार उत्पादन बढ़कर 80,590 MT पहुंचने का अनुमान है और औसत उत्पादकता 2.34 MT प्रति हेक्टेयर है। बिहार में 2025-26 के दौरान उत्पादन करीब 60,000 MT और औसत उत्पादकता 2.00 MT प्रति हेक्टेयर बताई गई है।
नई तकनीक और बेहतर किस्मों से बढ़ी उत्पादकता
परंपरागत रूप से तालाबों में उगाई जाने वाली मखाना फसल में अब आधुनिक खेती के तरीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। Field-System Farming और बेहतर किस्मों जैसे Swarna Vaidehi और Sabour Makhana-1 ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद की है। खेती का रकबा बढ़ने, Productivity में सुधार और उत्पादन से जुड़े जोखिम कम होने के कारण इस क्षेत्र में लगातार विस्तार देखने को मिल रहा है।
‘Mithila Makhana’ को मिला GI Tag
बिहार के मिथिला क्षेत्र में उत्पादित मखाना को Mithila Makhana GI Tag मिल चुका है। इससे इस क्षेत्र के मखाना की विशिष्ट गुणवत्ता, पारंपरिक ज्ञान और पहचान को कानूनी संरक्षण मिला है। GI Tag के कारण Domestic और International Markets में इसकी Branding और Market Differentiation को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
Domestic Market में तेजी से बढ़ रही मांग
भारत में हर साल 0.6 लाख Metric Tonnes से अधिक मखाना का उत्पादन होता है। इसका एक बड़ा हिस्सा घरेलू बाजार में खपता है, जबकि लगभग 40 प्रतिशत यानी करीब 0.23 से 0.25 लाख MT मखाना Export किया जाता है। Clean-label, Plant-based और Healthy Food Products की बढ़ती मांग ने मखाना को Premium Snack Category में मजबूत जगह दिलाई है।
2021-22 से 2024-25 के बीच घरेलू मखाना बाजार में करीब 17 से 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। स्वास्थ्य जागरूकता, प्रीमियमीकरण और ब्रांडेड खाद्य कंपनियों के विस्तार से इस वृद्धि में तेजी आई है। अनुमान है कि घरेलू मखाना बाजार 2029-30 तक 11,000 से 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
उत्पादन में FY 2022 से 2025 के बीच करीब 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि औसत कीमतों में काफी तेजी आई। 2020-22 में करीब 500 रुपये प्रति किलोग्राम की औसत कीमत 2025 में लगभग 1,250 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। इसके पीछे Healthy Snacks की बढ़ती मांग, Premium Branding और सीमित Supply Response जैसे कारण बताए जाते हैं।
त्योहारों में बढ़ जाती है मखाना की खपत
भारत में हर महीने करीब 3,000 से 3,500 MT Popped Makhana की घरेलू खपत होने का अनुमान है। त्योहारों के दौरान Snack Consumption बढ़ने से यह मांग करीब 5,000 MT प्रति माह तक पहुंच जाती है।
Branded FMCG और Organized Snack Players की हिस्सेदारी लगभग 1,800 से 2,000 MT प्रति माह है। वहीं Loose और Unorganized Retail से करीब 1,200 से 1,400 MT की खपत होती है। Tier-2 और Tier-3 Cities में अभी भी खुले बाजार में मिलने वाला मखाना लोकप्रिय है, हालांकि Packaged Makhana की मांग तेजी से बढ़ रही है।
अमेरिका और कनाडा हैं बड़े Export Markets
मखाना अब सिर्फ भारतीय बाजार तक सीमित नहीं है। 2025 में Directorate General of Foreign Trade यानी DGFT ने Popped Makhana और अन्य Makhana Products के लिए अलग HSN Code जारी किया। इससे इस सेक्टर के Export Data को अधिक स्पष्ट तरीके से दर्ज करना संभव हुआ।
2025-26 में भारत ने 7,264.89 MT Makhana Products का निर्यात किया, जिसकी Export Value करीब 19,296.08 लाख रुपये रही।
भारत के Makhana Export Markets में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत, कनाडा की 20 प्रतिशत और UAE की 17 प्रतिशत है। यानी ये तीनों बाजार मिलकर लगभग 77 प्रतिशत Export को कवर करते हैं। हालांकि Germany, Nepal और Australia जैसे छोटे बाजारों में प्रति किलोग्राम अधिक कीमत मिलने की संभावना है। इससे Premium Markets में Export Diversification की संभावनाएं बढ़ती हैं।
किसानों को खेती बढ़ाने के लिए मिल रही मदद
सरकारी योजना के तहत अलग-अलग राज्यों में अतिरिक्त 1,010 हेक्टेयर क्षेत्र को मखाना खेती के दायरे में लाया गया है, जबकि 73 हेक्टेयर में Seed Production Programme चलाया गया। बेहतर Production Technologies को किसानों तक पहुंचाने के लिए 89 Front Line Demonstrations यानी FLDs आयोजित किए गए।
State Agricultural Universities, Central Agricultural Universities और ICAR Institutes के सहयोग से किसानों के लिए Training Programmes, Seminars, Exposure Visits और Demonstrations आयोजित किए जा रहे हैं। 2025-26 में Central Sector Scheme for Development of Makhana के तहत देशभर में 8,159 किसान लाभान्वित हुए हैं।
पोषण के मामले में भी खास है मखाना
मखाना को आज Nutrient-Rich Superfood के रूप में पहचान मिल रही है। इसमें Carbohydrates, Protein, Dietary Fibre के साथ Magnesium, Potassium, Phosphorus और Iron जैसे जरूरी Micronutrients पाए जाते हैं। इसमें Sodium और Cholesterol की मात्रा कम होती है, जिसके कारण इसे कई तरह की Diet में शामिल किया जाता है।
मखाना में Fat की मात्रा भी काफी कम बताई जाती है। इसमें करीब 0.33 ग्राम Fat प्रति 100 ग्राम पाया जाता है। इसके अलावा इसमें Essential Amino Acids और लगभग 95 प्रतिशत Protein Digestibility बताई गई है। यही Nutritional Profile इसे Health-Conscious Consumers के बीच लोकप्रिय बना रही है।
Seed से Snack तक बनती है पूरी Value Chain
मखाना उत्पादन की प्रक्रिया खेती से शुरू होकर Processing और Packaging तक पहुंचती है। Farm Level पर Pond Preparation, Seed Broadcasting, Crop Management और Manual Harvesting की जाती है। पानी के भीतर से बीज निकालना काफी मेहनत वाला काम है और इस क्षेत्र में अभी भी Traditional Farming Practices का दबदबा है।
इसके बाद Raw Seeds की Cleaning और Drying की जाती है। High-Temperature Roasting के बाद बीजों को Pop किया जाता है। इसके बाद Polishing, Sorting और Grading होती है। बड़े और बेहतर Quality वाले मखाने को बाजार में अधिक कीमत मिलती है।
अब Secondary Processing के क्षेत्र में भी तेजी से बदलाव हो रहा है। Flavoured Makhana, Ready-to-Eat Snacks, Makhana Flour और अन्य Value-Added Products बाजार में आ रहे हैं। इससे रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।
National Research Centre for Makhana की अहम भूमिका
National Research Centre for Makhana (NRCM) मखाना सेक्टर को आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्था बेहतर खेती और Processing Techniques पर Research के साथ किसानों की Capacity Building पर भी काम करती है।
NRCM ने High-Yielding Makhana Seeds के साथ Thornless Water Chestnut Varieties, Water-Efficient Farming Systems और Makhana-cum-Fish Farming को बढ़ावा दिया है। अब तक किसानों, Krishi Vigyan Kendras और विभिन्न संस्थानों को 15,824.1 किलोग्राम High-Yielding Makhana Seeds वितरित किए जा चुके हैं।
2012 से 2023 के बीच 3,000 से अधिक किसानों को Improved Cultivation, Processing और Marketing Practices का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा NRCM ने 24 Enterprises को Technical Support दिया है, जिससे Rural Livelihoods और Makhana-based Agro Industries को बढ़ावा मिला है।
मशीनों और Value Addition से बदल रहा कारोबार
मखाना Processing में Technology का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए NRCM ने कई मशीनें विकसित की हैं। इनमें Makhana Seed Washer, Seed Grader, Primary Roasting Machine, Popping Machine और Popped Makhana Grader जैसी Technologies शामिल हैं। इन्हें Commercialization के लिए Manufacturers को भी उपलब्ध कराया गया है।
इससे आने वाले समय में Traditional Processing से आगे बढ़कर आधुनिक Makhana Processing Industry विकसित होने की संभावना है।
किसानों से Global Markets तक मखाने का बढ़ता सफर
मखाना आज भारत के तेजी से उभरते Agri-Food Sectors में शामिल हो चुका है। Traditional Farming Knowledge, अनुकूल Agro-Climatic Conditions, Government Support, Modern Technology और बढ़ती Global Demand ने इसके विकास की मजबूत नींव तैयार की है।
National Makhana Board और Development Scheme के जरिए सरकार पूरे Value Chain को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वहीं NRCM जैसे Research Institutions किसानों को आधुनिक तकनीक और बेहतर उत्पादन पद्धतियों से जोड़ रहे हैं।
Healthy, Plant-Based और Premium Food Products की वैश्विक मांग बढ़ने के साथ भारतीय मखाने के लिए International Market में बड़ी संभावनाएं हैं। आने वाले वर्षों में यह पारंपरिक फसल किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार और Agricultural Exports को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
