नई दिल्ली. पैकेज्ड फूड में ज्यादा फैट, चीनी और नमक यानी High Fat, Sugar and Salt (HFSS) की मात्रा को लेकर उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता बढ़ रही है। इसी बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी फ्रंट-ऑफ-पैक वार्निंग लेबल दिखाने के प्रस्ताव को उपभोक्ताओं का मजबूत समर्थन मिला है।
LocalCircles के एक सर्वे के मुताबिक, 91 प्रतिशत लोगों ने ऑनलाइन खरीदे जाने वाले HFSS खाद्य उत्पादों पर स्पष्ट चेतावनी दिखाने का समर्थन किया है। सर्वे में 20,435 लोगों की प्रतिक्रियाएं शामिल की गईं।
प्रोडक्ट खरीदने से पहले Warning Label देखने की मांग
सर्वे में 89 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि HFSS चेतावनी को ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर प्रोडक्ट की लिस्टिंग के साथ-साथ उसके डिटेल पेज पर भी प्रमुखता से दिखाया जाना चाहिए। वहीं 2 प्रतिशत लोगों ने केवल प्रोडक्ट के विस्तृत पेज पर चेतावनी दिखाने का समर्थन किया।
इस तरह कुल 91 प्रतिशत उपभोक्ता ऑनलाइन वार्निंग लेबल के पक्ष में नजर आए। वहीं 7 प्रतिशत लोगों का कहना था कि अगर चेतावनी उत्पाद की फिजिकल पैकेजिंग पर मौजूद है तो वही पर्याप्त है। 2 प्रतिशत लोगों ने इस सवाल पर कोई स्पष्ट राय नहीं दी।
Quick Commerce में ज्यादा जरूरी है ऑनलाइन चेतावनी
LocalCircles के मुताबिक, ऑनलाइन चेतावनी दिखाना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज बड़ी संख्या में लोग किराना और पैकेज्ड फूड की खरीदारी ऑनलाइन कर रहे हैं। खासकर Quick Commerce प्लेटफॉर्म पर ग्राहक कुछ ही मिनटों में सामान ऑर्डर कर देते हैं।
ऐसे में कई बार ग्राहक प्रोडक्ट की असली पैकेजिंग या उस पर दी गई Nutrition Information देख ही नहीं पाते। वे Thumbnail, Search Result, Category List या Promotional Banner देखकर सीधे सामान कार्ट में जोड़ सकते हैं।
ऑनलाइन Grocery Market तेजी से बढ़ा
सर्वे के अनुसार, भारत में ऑनलाइन Grocery Market का आकार 2024 में करीब 8.8 बिलियन डॉलर था। अनुमान है कि पैकेज्ड फूड और किराना उत्पादों की कुल खरीदारी में करीब 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा अब ऑनलाइन माध्यम से हो रहा है।
वहीं Quick Commerce ऑनलाइन Grocery Orders का करीब दो-तिहाई हिस्सा संभालता है। FY25 में इसका बाजार करीब 7.1 से 7.4 बिलियन डॉलर के बीच रहने का अनुमान लगाया गया था।
LocalCircles का कहना है कि Quick Commerce के बढ़ते इस्तेमाल ने खरीदारी का फैसला लेने का समय भी कम कर दिया है। इसलिए उपभोक्ताओं को उसी जगह जरूरी जानकारी मिलना महत्वपूर्ण है, जहां वे खरीदारी का फैसला कर रहे हैं।
केवल Nutrition Information में छिपा Warning Label नहीं चाहते ग्राहक
सर्वे में शामिल उपभोक्ताओं ने यह भी संकेत दिया कि चेतावनी को Nutrition Information के बीच छिपाकर नहीं रखा जाना चाहिए। लोगों की मांग है कि Warning Label प्रोडक्ट की Listing Level पर ही साफ दिखाई दे, जहां अलग-अलग उत्पादों की तुलना की जाती है।
इसके अलावा Product Page पर भी खरीदारी पूरी करने से पहले चेतावनी स्पष्ट रूप से नजर आनी चाहिए। इससे ग्राहक प्रोडक्ट को कार्ट में जोड़ने से पहले उसके पोषण संबंधी जोखिमों को समझ सकेंगे।
मोबाइल स्क्रीन पर भी साफ दिखना चाहिए Warning
LocalCircles के अनुसार, FSSAI के प्रस्ताव में ऑनलाइन डिस्प्ले की व्यवस्था शामिल करना उपभोक्ताओं की एक प्रमुख मांग को संबोधित करता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे किस तरह लागू किया जाता है।
सर्वे में लोगों ने जोर दिया कि Warning Label मोबाइल स्क्रीन पर भी आसानी से दिखाई देना चाहिए। इसे Product Listing में स्पष्ट और अलग तत्व के रूप में दिखाया जाए, न कि केवल Product Image के अंदर शामिल कर दिया जाए।
एक Nutrient की सीमा पार होने पर भी Warning की मांग
सर्वे में फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग को लेकर उपभोक्ताओं की कई अन्य अपेक्षाएं भी सामने आईं। करीब 80 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अगर किसी प्रोडक्ट में एक भी Nutrient निर्धारित सीमा से ज्यादा है तो शुरुआत से ही चेतावनी दी जानी चाहिए।
वहीं 88 प्रतिशत उपभोक्ता बड़े और तुरंत दिखाई देने वाले Warning Label के पक्ष में रहे। 90 प्रतिशत लोगों ने चाहा कि चेतावनी में उस Nutrient की कुल मात्रा भी स्पष्ट रूप से दिखाई जाए। इसके अलावा 88 प्रतिशत लोगों ने व्यवस्था को छह महीने के भीतर लागू करने की मांग की।
28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
फ्रंट-ऑफ-पैक Warning Label को लेकर मामला अभी चर्चा में है। LocalCircles के मुताबिक, 3S और Our Health Society की ओर से दायर जनहित याचिका पर हाल की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जे.बी. पार्डीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने FSSAI के प्रस्तावित दो चरणों वाले सिस्टम पर सवाल किए।
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि क्या चेतावनी तभी लागू होगी, जब किसी प्रोडक्ट में दो Nutrients निर्धारित सीमा से ऊपर हों। FSSAI की ओर से बताया गया कि इस दिशा में पहले के प्रस्ताव में बदलाव किया गया है और आवश्यकताओं को एक साथ लाया जाएगा।
इसका संकेत है कि किसी एक Nutrient की निर्धारित सीमा पार होने पर भी Warning Label लगाने का प्रावधान हो सकता है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को निर्धारित है।
ऑनलाइन Grocery और Quick Commerce का विस्तार लगातार हो रहा है। ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर Front-of-Pack Warning Label लागू होने से उपभोक्ताओं को ऑनलाइन खरीदारी के दौरान भी वही महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है, जो उन्हें किसी दुकान से पैकेज्ड फूड खरीदते समय पैकेट पर दिखाई देती है।

