नई दिल्ली. केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री George Kurian ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह इस्तीफा प्रधानमंत्री Narendra Modi की सलाह पर स्वीकार किया गया है। इसके साथ ही जॉर्ज कुरियन का केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में कार्यकाल समाप्त हो गया है।
कम समय में खत्म हुआ मंत्री पद का कार्यकाल
जॉर्ज कुरियन को अगस्त 2024 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दौरान केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। लेकिन एक साल से भी कम समय में उनका मंत्री पद समाप्त हो गया। सूत्रों के अनुसार, उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद राजनीतिक स्थिति के कारण उन्हें मंत्रिमंडल में बने रहना कठिन हो गया था।
राष्ट्रपति भवन का आधिकारिक बयान
राष्ट्रपति भवन ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार किया है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
कौन हैं जॉर्ज कुरियन?
जॉर्ज कुरियन 65 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा नेता हैं, जो 1980 में पार्टी की स्थापना के समय से ही संगठन से जुड़े हुए हैं। वे केरल की ईसाई समुदाय Syro-Malabar Catholic Church से संबंध रखते हैं और पार्टी संगठन में कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा में राष्ट्रीय सचिव और भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई है।
राजनीतिक सफर और चुनावी पृष्ठभूमि
2016 के केरल विधानसभा चुनाव में उन्होंने पुथुपल्ली सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमन चांडी से हार गए थे। इससे पहले उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता ओ. राजगोपाल के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) के रूप में भी काम किया था।
कैबिनेट से बाहर होने का कारण
सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद उनके पास संसद में सक्रिय प्रतिनिधित्व नहीं था, जिससे मंत्री पद पर बने रहना मुश्किल हो गया। इसी स्थिति के चलते उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया।
जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने संगठन और सरकार में लंबे समय तक योगदान दिया है, लेकिन मौजूदा संसदीय स्थिति के चलते उनका कार्यकाल समाप्त हो गया।
