पिघलते ग्लेशियर और उजड़ते जंगल की चिंता

कुल्लू. हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रहे जलवायु परिवर्तन से हर वर्ग चिचिंत है. हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिर्वतन के क्या कारण है और जलवायु परिवर्तन को कैसे कम किया जा सकता है. इस पर देव सदन कुल्लू में मंथन किया गया है. हिमाचल प्रदेश के शीत मरुस्थल में जलवायु परिवर्तन एवं वहां के संस्कृति,कला और जन जीवन पर देव सदन कुल्लू में एक संगोष्ठी आयोजित की गई.

पिघलते ग्लेशियर और उजड़ते जंगल की चिंता

 

सहायक आयुक्त अमित गुलेरिया मुख्य अतिथि

संगोष्ठी में विभिन्न पर्यावरण विदों और विशेषज्ञों ने भाग लिया. ग्लेशियर, जंगल और जमीन विषय पर हिमाचल प्रदेश कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग कुल्लू और आजाद जनजातिय धरोहर सुरक्षा समिति ने इस संगोष्ठी का आयोजन किया. संगोष्ठी में सहायक आयुक्त अमित गुलेरिया ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की. संगोष्ठी में मिसेज एशिया इंटरनेशनल फोटो जेनिक फेस 2017 कल्पना ठाकुर ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की. संगोष्ठी के आयोजक श्याम चंद आजाद ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ जनजातिय क्षेत्र लाहुल स्पीति और पांगी में भी जलवायु परिवर्तन का खासा असर देखा गया है.

पर्यावरण में होते बदलाव की चिंता

सेब की बेल्ट कुल्लू-मनाली से खिसक कर अब लाहुल घाटी में पहुंच गई है. यह सब जलवायु परिर्वतन के कारण हुआ है. हमें अपने पर्यावरण की रक्षा के लिए क्या-क्या कदम उठाने चाहिए. इसके लिए देव सदन कुल्लू में एक संगोष्ठी आयोजित की गई. इस संगोष्ठी में कुल्लू, लाहुल स्पीति समेत प्रदेश के विभिन्न बुद्धिजीवी और जीवी पंत पर्यावरण संस्थान मौहल के विशेषज्ञों ने भाग लिया. संगोष्ठी में जीवी पंत संस्थान के वैज्ञानिक जीसी कुनियाल ने जलवायु परिर्वतन पर विस्तार से जानकारी दी.