नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार ने विपक्ष के साथ बातचीत शुरू कर दी है। इसी बीच Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 (FCRA Bill) को लेकर सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि इसके प्रावधानों को लेकर विपक्ष और सामाजिक-धार्मिक संगठनों की चिंताओं को दूर किया जा सकता है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि प्रस्तावित कानून में ऐसा कोई retrospective penal provision नहीं होगा, जिसके जरिए पुराने मामलों या पहले किए गए निवेश पर कार्रवाई की जा सके।
विपक्ष से संवाद के बीच FCRA Bill पर सरकार का आश्वासन
सरकार की ओर से यह संकेत ऐसे समय आया है जब संसद में लगातार हंगामे के कारण कार्यवाही प्रभावित हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, FCRA Amendment Bill 2026 को मौजूदा मानसून सत्र में पेश करने का फैसला विपक्ष के इस रुख पर निर्भर करेगा कि वह सदन में बिल पर चर्चा की अनुमति देता है या नहीं। संसद का मौजूदा सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने वाला है।
ईसाई संगठनों और अन्य civil society groups ने बिल के कुछ प्रावधानों पर चिंता जताई है। खास तौर पर विदेशी योगदान से बनाई गई संपत्तियों को सरकार द्वारा नामित प्राधिकरण के नियंत्रण में देने से जुड़े नियमों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इन संगठनों को आशंका है कि यदि किसी संस्था का FCRA registration समाप्त या रद्द हो जाता है तो उसके पुराने निवेश और उनसे बनी संपत्तियां भी नए कानून के दायरे में आ सकती हैं।
धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों को लेकर चिंता
प्रस्तावित कानून में asset vesting provisions को लेकर सबसे ज्यादा बहस हो रही है। इसके तहत यदि किसी संस्था का FCRA प्रमाणपत्र समाप्त हो जाता है, उसका नवीनीकरण नहीं होता या वह पंजीकरण छोड़ देती है, तो विदेशी योगदान से बनाई गई संपत्तियों को Designated Authority के अधीन किए जाने का प्रावधान है।
सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य धार्मिक या सामाजिक संस्थाओं की संपत्ति पर कब्जा करना नहीं, बल्कि FCRA registration में किसी तरह की discontinuity आने की स्थिति में संस्थान की संपत्तियों और संचालन की व्यवस्था बनाए रखना है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, ऐसी स्थिति में interim management की व्यवस्था की जा सकती है और यदि मूल संस्था निर्धारित अवधि में दोबारा registration हासिल कर लेती है तो संपत्ति उसे वापस की जा सकती है।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि धार्मिक संस्थानों के संचालन में उनके धार्मिक स्वरूप और परंपराओं का ध्यान रखा जाएगा। यही वजह है कि सरकार की ओर से बिल के प्रावधानों को लेकर उठ रही आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की जा रही है।
FCRA Bill के किन प्रावधानों पर विवाद?
बिल के Section 14B में FCRA certificate के “cessation” की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके तहत यदि कोई संगठन अपने प्रमाणपत्र के renewal के लिए आवेदन नहीं करता, renewal से इनकार कर दिया जाता है या प्रमाणपत्र की अवधि समाप्त होने के बाद उसका नवीनीकरण नहीं होता, तो प्रमाणपत्र को समाप्त माना जा सकता है।
इसके बाद Section 16A के तहत विदेशी योगदान से प्राप्त धन और उससे बनाई गई संपत्तियों को Designated Authority के अधीन करने का प्रावधान है। यदि संस्था निर्धारित अवधि के भीतर नया या renewed FCRA registration हासिल कर लेती है तो संपत्तियां वापस की जा सकती हैं। ऐसा नहीं होने पर संपत्ति स्थायी रूप से प्राधिकरण के अधीन रह सकती है और कानून के मुताबिक उसे सरकारी विभाग या एजेंसी को हस्तांतरित अथवा अन्य तरीके से निपटाया जा सकता है।
वहीं Section 16B को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह प्रावधान पहले के कानून के तहत पहले से vest हो चुकी संपत्तियों पर भी नए framework को लागू कर सकता है। इसी वजह से यह आशंका जताई जा रही है कि पुराने समय में FCRA registration समाप्त हो चुके संगठनों की संपत्तियां भी नए नियमों के दायरे में आ सकती हैं।
कांग्रेस और विपक्ष की क्या है स्थिति?
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। करीब 50 मिनट चली बैठक में संसद की कार्यवाही को सुचारू बनाने के साथ-साथ सरकार के legislative agenda पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, FCRA Amendment Bill के अलावा Delimitation Bill से जुड़े संभावित Constitutional Amendment Bill को दोबारा पेश करने के मुद्दे पर भी बातचीत हुई।
हालांकि, विपक्ष की ओर से सरकार को तत्काल कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया। विपक्ष ने मांग दोहराई कि गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली में 20 जुलाई को छात्रों और युवाओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर सदन में बयान दें। इसके अलावा अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े donation money की कथित चोरी के मुद्दे पर भी संसद में चर्चा की मांग की गई है।
कांग्रेस ने फिलहाल delimitation के मुद्दे पर अपना रुख बदलने से इनकार किया है। पार्टी ने अन्य विपक्षी दलों से बातचीत कर संसद के लिए साझा रणनीति तैयार करने का फैसला किया है।
DMK के रुख पर भी कांग्रेस की नजर
कांग्रेस विपक्षी दलों के साथ-साथ उन पार्टियों से भी संपर्क कर रही है जो INDIA bloc का हिस्सा नहीं हैं। इस क्रम में DMK के साथ भी अनौपचारिक बातचीत जारी है। हालांकि, कांग्रेस को उम्मीद है कि delimitation के मुद्दे पर DMK अपने पुराने रुख से पीछे नहीं हटेगी।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अप्रैल में Delimitation Bill की आलोचना करते हुए इसे “black law” बताया था। ऐसे में पार्टी को भरोसा है कि DMK इस मुद्दे पर सरकार के साथ नहीं जाएगी।
संसद का गतिरोध खत्म होगा या नहीं?
फिलहाल सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत का सिलसिला जारी है। किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी को मतभेदों के बावजूद बातचीत जारी रखने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी मानसून सत्र की अवधि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
आने वाले दिनों में FCRA Bill 2026, delimitation और संसद में उठाए जा रहे अन्य मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है, इस पर नजर रहेगी। यदि सरकार FCRA Bill के retrospective impact को लेकर विपक्ष और धार्मिक संगठनों को स्पष्ट आश्वासन देने में सफल रहती है, तो इस विवादित legislation को संसद में आगे बढ़ाने की राह कुछ आसान हो सकती है।
