नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नई रिपोर्ट ने बैंकिंग सेक्टर में डिजिटल धोखाधड़ी और लोन फ्रॉड को लेकर खलबली मचा दी है। वित्त वर्ष 2024-25 में बैंकिंग धोखाधड़ी की कुल राशि तीन गुना बढ़कर ₹36,014 करोड़ हो गई है, जबकि पिछले वर्ष ये राशि ₹12,230 करोड़ थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरकारी बैंक (Public Sector Banks) फ्रॉड की रकम के मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं।
धोखाधड़ी के बढ़ने की मुख्य वजह क्या है?
RBI ने स्पष्ट किया है कि धोखाधड़ी की राशि में यह भारी उछाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत 122 पुराने मामलों को फिर से “फ्रॉड” की श्रेणी में दर्ज करने की वजह से हुआ है। ये सभी मामले ₹18,674 करोड़ के थे, जिन्हें पुनः परीक्षण के बाद चालू वित्त वर्ष में रिपोर्ट किया गया।
कौन-से बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए?
Value (राशि) के हिसाब से
Public Sector Banks (सरकारी बैंक) सबसे ज्यादा प्रभावित – कुल फ्रॉड का 92% से ज्यादा हिस्सा कर्ज से जुड़ा।
Number (मामलों की संख्या) के हिसाब से:
Private Sector Banks (निजी बैंक) आगे – कुल फ्रॉड मामलों का 60% हिस्सा।
इनमें से Card और Internet Fraud सबसे अधिक पाए गए।
Digital Payment में सबसे ज्यादा फ्रॉड
कार्ड और इंटरनेट आधारित फ्रॉड मामलों की संख्या: 13,516
कुल धोखाधड़ी के मामलों में हिस्सा: 56.5%
यह दिखाता है कि UPI, Credit/Debit Cards और Net Banking में साइबर सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।
RBI रिपोर्ट की मुख्य बातें (RBI Fraud Report Highlights):
- ₹36,014 करोड़ तक पहुंची धोखाधड़ी की कुल राशि (FY 2024-25)
- सिर्फ 23,953 फ्रॉड केस दर्ज, जबकि पिछले साल थे 36,060
- Loan Fraud में सरकारी बैंकों का दबदबा – 92%+ राशि इन्हीं से जुड़ी
- Digital Fraud (Cards & Internet) का सबसे ज्यादा असर निजी बैंकों में
- Supreme Court Orders के चलते पुराने मामलों को फिर से फ्रॉड कैटेगरी में डाला गया
सावधानी जरूरी: क्या सीख मिली?
बढ़ते Bank Frauds in India, खासकर डिजिटल पेमेंट्स में, यह साफ कर रहे हैं कि ग्राहकों को साइबर सुरक्षा को गंभीरता से लेना होगा। साथ ही, बैंकों को भी अपने fraud detection systems को और मजबूत करने की जरूरत है।
