नई दिल्ली. Supreme Court of India ने एक अहम फैसले में कहा है कि सरकारी कर्मचारियों को सिर्फ इसलिए पुराने नियमों के तहत पदोन्नति (प्रमोशन) पाने का अधिकार नहीं मिल जाता क्योंकि रिक्तियां पहले उत्पन्न हुई थीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को सेवा नियमों में बदलाव करने, चयन प्रक्रिया बदलने और पदों के पुनर्गठन का अधिकार है, बशर्ते फैसला मनमाना न हो।
ओडिशा परिवहन विभाग से जुड़ा है मामला
यह मामला Odisha परिवहन विभाग के कर्मचारियों से जुड़ा था। कर्मचारी जूनियर स्तर पर नियुक्त हुए थे और बाद में वरिष्ठ पद पर पदोन्नत किए गए थे। उन्होंने सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (ARTO) पद पर प्रमोशन की मांग की थी। कर्मचारियों का तर्क था कि जब पुरानी नियमावली लागू थी, उस समय रिक्तियां मौजूद थीं और उस नियम के अनुसार पांच वर्ष का अनुभव रखने वाले ग्रेड-1 असिस्टेंट प्रमोशन के पात्र थे। हालांकि राज्य सरकार ने यह कहते हुए मांग ठुकरा दी कि केवल रिक्तियां पहले पैदा हो जाने से कर्मचारियों को प्रमोशन का “वेस्टेड राइट” नहीं मिल जाता। सरकार ने कहा कि उसे कैडर पुनर्गठन और चयन प्रक्रिया बदलने का अधिकार है।
सरकार ने बदला चयन का तरीका
मामले की सुनवाई जस्टिस Dipankar Datta और जस्टिस Augustine George Masih की पीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि 2017 में ओडिशा सरकार ने ARTO पद को ग्रुप-सी से ग्रुप-बी पद में बदल दिया था। बाद में 2021 में नए सेवा नियम लागू किए गए, जिनके तहत इस पद पर भर्ती Odisha Public Service Commission (OPSC) की प्रतियोगी परीक्षा के जरिए की जानी तय हुई। इसके साथ ही पुरानी कार्यकारी व्यवस्थाएं समाप्त कर दी गईं।
हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने पलटा
इससे पहले हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) बुलाकर कर्मचारियों के प्रमोशन पर विचार करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने कुछ पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी थी। राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
“प्रमोशन का अधिकार नहीं, सिर्फ विचार का अधिकार”
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी कर्मचारी को प्रमोशन पाने का मौलिक या स्थायी अधिकार नहीं होता। कर्मचारी केवल इस बात की अपेक्षा कर सकता है कि उसकी उम्मीदवारी पर विचार किया जाए।
अदालत ने कहा कि यदि सरकार किसी पद को प्रमोशन के बजाय चयन आधारित पद बनाना चाहती है, तो यह नीति निर्धारण का हिस्सा है और इसमें अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती, जब तक निर्णय मनमाना साबित न हो।
सरकार के फैसले को सही ठहराया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार ने कैडर पुनर्गठन और नए नियम लागू करने के कारण पुराने तरीके से पद नहीं भरे, जो पूरी तरह कानून के अनुरूप है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कोई अनिवार्य नियम नहीं है कि रिक्तियां उसी नियम के तहत भरी जाएं जो रिक्ति पैदा होने के समय लागू था।
इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार की अपील मंजूर करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।
