नई दिल्ली. देश के कई हिस्सों में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने Sugar Prices को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने की बात कही है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को कहा कि सरकार बाजार में उपलब्ध चीनी का पर्याप्त स्टॉक जारी करवाएगी, ताकि supply बढ़े और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्यों को भी यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं को चीनी उचित कीमतों पर उपलब्ध हो।
बाजार में पर्याप्त चीनी का स्टॉक मौजूद
हुबली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रह्लाद जोशी ने कहा कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। भारत में सालाना करीब 280 लाख टन चीनी की जरूरत होती है, जबकि वर्तमान में लगभग 306 लाख टन का स्टॉक उपलब्ध है। ऐसे में घरेलू मांग पूरी करने के लिए देश में पर्याप्त मात्रा में चीनी मौजूद है।
केंद्र सरकार का कहना है कि उपलब्ध स्टॉक को सही तरीके से बाजार में पहुंचाने से Sugar Price Rise को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। सरकार इस बात पर भी नजर रख रही है कि कहीं पर्याप्त stock होने के बावजूद supply में कमी पैदा करके कीमतें तो नहीं बढ़ाई जा रही हैं।
राज्यों को भी दिए गए निर्देश
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया है कि वे चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करें और इसे पहले की कीमतों के आसपास उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए जरूरी कदम उठाएं। इसके साथ ही Hoarding यानी जमाखोरी या कृत्रिम रूप से कीमत बढ़ाने की कोशिश करने वाले कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को भी कहा गया है।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में चीनी की पर्याप्त supply बनी रहे और traders द्वारा stock रोककर कीमतों को प्रभावित न किया जा सके।
कर्नाटक में चीनी के बड़े स्टॉक पर सरकार की नजर
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कर्नाटक में बड़ी मात्रा में चीनी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि वह राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर Sugar Stock और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाने का अनुरोध करेंगे।
कर्नाटक देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में वहां उपलब्ध stock को बाजार में उचित तरीके से पहुंचाना स्थानीय स्तर पर बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में उठाए गए कदम
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक Uttar Pradesh और Maharashtra सरकारें चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर पहले ही जरूरी कदम उठा चुकी हैं। इन राज्यों में बाजार में supply बनाए रखने और कीमतों पर नियंत्रण के लिए प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।
सरकार का मानना है कि बड़े चीनी उत्पादक राज्यों में stock management और market supply बेहतर होने से देश के अन्य हिस्सों में भी कीमतों पर दबाव कम किया जा सकता है।
सरकार की नजर जमाखोरी पर
चीनी के दाम बढ़ने के बीच केंद्र सरकार की चिंता केवल supply को लेकर नहीं है, बल्कि Artificial Price Rise और जमाखोरी को लेकर भी है। यदि कारोबारी पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद चीनी को बाजार में जारी नहीं करते हैं, तो इससे supply प्रभावित हो सकती है और retail prices बढ़ सकते हैं।
इसी वजह से राज्य सरकारों को ऐसे व्यापारियों पर नजर रखने और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र चाहता है कि उपलब्ध चीनी consumers तक समय पर पहुंचे और बाजार में किसी तरह की कृत्रिम कमी पैदा न हो।
306 लाख टन स्टॉक से घरेलू मांग पूरी करने का दावा
सरकार द्वारा बताए गए आंकड़ों के अनुसार देश में करीब 306 लाख टन चीनी का स्टॉक मौजूद है, जबकि सालाना घरेलू खपत लगभग 280 लाख टन है। इन आंकड़ों के आधार पर सरकार का कहना है कि देश में घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है।
अब सरकार की कोशिश इस stock को market में सुचारू रूप से उपलब्ध कराने की है, ताकि Sugar Prices में आई तेजी को कम किया जा सके और आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
आम लोगों को कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ता है। त्योहारों और घरेलू खपत बढ़ने के समय इसकी मांग भी बढ़ जाती है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा market supply बढ़ाने और hoarding के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रह्लाद जोशी ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार उचित कदम उठाकर चीनी को बाजार में सही तरीके से उपलब्ध कराने और कीमतों को नियंत्रण में लाने की कोशिश करेगी। अब निगाह इस बात पर है कि राज्यों और बाजार में इन निर्देशों को कितनी तेजी से लागू किया जाता है और इसका Retail Sugar Price पर कितना असर पड़ता है।

