नई दिल्ली. देश में हाथ से मैला ढोना को खत्म करने की दिशा में सरकार की ओर से बड़ा दावा सामने आया है। केंद्र सरकार ने बताया है कि हाथ से मैला ढोने वालों के तौर पर रोज़गार पर रोक और उनके पुनर्वास का अधिनियम, 2013 के तहत वर्ष 2024-25 में कराए गए देशव्यापी सर्वे में किसी भी जिले में एक भी मैनुअल स्कैवेंजर की पहचान नहीं हुई। सरकार के मुताबिक, यह स्थिति देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग को समाप्त करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का महत्वपूर्ण परिणाम है।
2024-25 के सर्वे में नहीं मिला कोई मैनुअल स्कैवेंजर
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में सरकार की ओर से यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2024-25 में nationwide survey के दौरान देश के किसी भी जिले में मैनुअल स्कैवेंजर की पहचान नहीं हुई।
सरकार का यह दावा ऐसे समय आया है जब देश में लंबे समय से मैनुअल स्कैवेंजिंग जैसी अमानवीय प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने और इससे जुड़े लोगों के पुनर्वास पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का कहना है कि सर्वे, पुनर्वास योजनाओं और sanitation व्यवस्था के mechanisation के जरिए इस प्रथा को खत्म करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
2013 और 2018 के सर्वे में 58,098 लोगों की हुई थी पहचान
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इससे पहले 2013 और 2018 में किए गए nationwide surveys के दौरान कुल 58,098 मैनुअल स्कैवेंजर की पहचान की गई थी। सरकार के अनुसार, इन सभी चिन्हित लोगों को पुनर्वास प्रक्रिया के तहत One-Time Cash Assistance उपलब्ध कराई गई।
हर चिन्हित मैनुअल स्कैवेंजर को 40 हजार रुपये की One-Time Cash Assistance दी गई। सरकार का उद्देश्य इस आर्थिक सहायता के जरिए प्रभावित लोगों को मैनुअल स्कैवेंजिंग से बाहर निकालकर वैकल्पिक आजीविका की ओर बढ़ने में मदद करना था।
पुनर्वास के लिए रोजगार और स्किल ट्रेनिंग पर जोर
सरकार ने बताया कि मैनुअल स्कैवेंजर और उनके आश्रितों के पुनर्वास के लिए पहले संचालित Self Employment Scheme for Rehabilitation of Manual Scavengers को अब NAMASTE Scheme में शामिल कर दिया गया है। इस व्यवस्था के तहत प्रभावित परिवारों को स्थायी और सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराने के लिए अलग-अलग पहल जारी हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच कुल 5,632 मैनुअल स्कैवेंजर और उनके आश्रितों को Skill Development Training दी गई। इसका उद्देश्य लाभार्थियों को नए कौशल से जोड़कर उनके लिए वैकल्पिक रोजगार के अवसर तैयार करना है, ताकि वे मैनुअल स्कैवेंजिंग पर निर्भर न रहें।
483 लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए मिली मदद
पुनर्वास कार्यक्रम के तहत आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। सरकार के अनुसार, इस अवधि में 483 लाभार्थियों को Capital Subsidy प्रदान की गई, ताकि वे वैकल्पिक Self-Employment Ventures शुरू कर सकें।
सरकार का मानना है कि केवल आर्थिक सहायता देना पर्याप्त नहीं है। मैनुअल स्कैवेंजर और उनके परिवारों को स्थायी आजीविका, कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से rehabilitation initiatives को रोजगार और skill development से जोड़ा गया है।
Mechanised Sanitation से खत्म करने की कोशिश
केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि सरकार sanitation workers की गरिमा, सुरक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए Mechanised Sanitation को बढ़ावा देने के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर coordinated efforts किए जा रहे हैं।
सरकार का लक्ष्य देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग के सभी रूपों को समाप्त करना है। इसके लिए सफाई व्यवस्था में मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने, sanitation workers की सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रभावित लोगों को वैकल्पिक आजीविका से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
मैनुअल स्कैवेंजिंग खत्म करने की दिशा में सरकार का दावा
2024-25 के सर्वे में किसी भी जिले में मैनुअल स्कैवेंजर की पहचान नहीं होने का सरकारी दावा इस दिशा में चलाए जा रहे अभियान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से rehabilitation और mechanised sanitation initiatives को जारी रखने पर जोर दिया गया है, ताकि भविष्य में भी मैनुअल स्कैवेंजिंग की किसी भी स्थिति को रोका जा सके।
केंद्र सरकार के अनुसार, sanitation workers की dignity, safety and rehabilitation सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर किए जा रहे प्रयासों के जरिए देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
