नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol-EBP) को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक दावों को खारिज करते हुए कहा है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर तैयार किया गया है और इसकी लगातार निगरानी की जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम के खिलाफ प्रसारित की जा रही कई जानकारियां तथ्यहीन और जनता को भ्रमित करने वाली हैं।
सरकार ने कहा कि देश में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को लागू किया गया है। इस योजना को व्यापक परीक्षणों और विशेषज्ञों की सलाह के बाद चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया है।
सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे दावों को बताया भ्रामक
सरकार ने कहा कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर कई तरह की अपुष्ट और भ्रामक जानकारियां साझा की जा रही हैं। इनमें दावा किया जा रहा है कि एथेनॉल मिश्रण से वाहनों के इंजन खराब हो रहे हैं या उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
सरकार के अनुसार, ऐसे दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। संबंधित एजेंसियों और विशेषज्ञ संस्थानों द्वारा किए गए परीक्षणों में ऐसे आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।
लगातार निगरानी में है एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम
सरकार ने बताया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाती है। इस प्रक्रिया में तेल विपणन कंपनियां, वाहन निर्माता कंपनियां, ईंधन परीक्षण एजेंसियां और अन्य संबंधित पक्ष शामिल रहते हैं।
इन सभी हितधारकों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया जाता है कि ईंधन की गुणवत्ता और वाहनों के प्रदर्शन पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
E20 पेट्रोल के बाद नहीं मिली इंजन फेल होने की व्यापक शिकायतें
सरकार ने विशेष रूप से बताया कि देश में E20 पेट्रोल लागू किए जाने के बाद से इंजन फेल होने या वाहनों के बड़े पैमाने पर खराब होने जैसी कोई व्यापक शिकायत सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों की निगरानी में किए गए परीक्षणों और फील्ड रिपोर्ट्स के आधार पर यह पाया गया है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित है और इसका उपयोग वाहन निर्माता कंपनियों की तकनीकी सिफारिशों के अनुसार किया जा रहा है।
किसानों और ऊर्जा क्षेत्र को मिल रहा लाभ
सरकार का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का लाभ केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे किसानों को भी बड़ा फायदा हो रहा है। गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाले एथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि हो रही है।
साथ ही, देश का विदेशी मुद्रा खर्च भी कम हो रहा है क्योंकि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से कच्चे तेल के आयात की आवश्यकता घटती है।
हर पहलू पर नजर रख रही सरकार
सरकार ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से जुड़े हर पहलू पर लगातार नजर रखी जा रही है। यदि किसी स्तर पर कोई तकनीकी समस्या सामने आती है तो संबंधित एजेंसियों और विशेषज्ञों के सहयोग से उसका तत्काल समाधान किया जाता है।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अपुष्ट जानकारियों पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं पर भरोसा करें।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे पर्यावरण संरक्षण, किसानों की आय वृद्धि और ऊर्जा सुरक्षा जैसे कई राष्ट्रीय लक्ष्यों को एक साथ हासिल करने में मदद मिल रही है।
सरकार का कहना है कि वैज्ञानिक परीक्षणों और निरंतर निगरानी के आधार पर यह कार्यक्रम आगे भी जारी रहेगा और देश के सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

