नई दिल्ली. केंद्र सरकार ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और स्वयं सहायता समूहों (SHG) के कामकाज को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी उद्देश्य से दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत LokOS (लोकओएस) नाम का डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है।
यह वेब और मोबाइल आधारित प्लेटफॉर्म स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और उनके संगठनों के पूरे कामकाज को डिजिटल रूप से संचालित करेगा। इससे रिकॉर्ड रखने से लेकर बचत, लोन, भुगतान और आजीविका से जुड़ी सभी जानकारियां एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी।
क्या है LokOS?
LokOS में Lok का मतलब ‘लोग’ और OS का मतलब ‘ऑपरेटिंग सिस्टम’ है। यह ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो गांवों में काम कर रहे स्वयं सहायता समूहों और सामुदायिक संगठनों के सभी रिकॉर्ड ऑनलाइन रखता है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए समूह के सदस्यों की जानकारी, बचत, ऋण, किस्तों का भुगतान, वित्तीय लेनदेन, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी डिजिटल रूप में दर्ज की जाती है। सरकार का कहना है कि इससे कागजी रिकॉर्ड रखने की जरूरत कम होगी और कामकाज अधिक पारदर्शी तथा आसान बनेगा।
हर साल 2 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन की होगी डिजिटल निगरानी
LokOS के जरिए स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्क में होने वाले करीब 2 लाख करोड़ रुपये के वार्षिक वित्तीय लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा।
इससे सभी लेनदेन की रियल टाइम निगरानी संभव होगी। साथ ही वित्तीय गड़बड़ियों पर रोक लगाने और जवाबदेही बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
वेब और मोबाइल ऐप दोनों की सुविधा
LokOS को वेब और मोबाइल ऐप दोनों रूपों में तैयार किया गया है। वेब पोर्टल का उपयोग प्रशासनिक अधिकारी, ई-बुक कीपर और अन्य अधिकृत अधिकारी करेंगे। इसके जरिए नए स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन और क्लस्टर स्तर के संगठनों का पंजीकरण तथा अनुमोदन किया जाएगा।
वहीं मोबाइल ऐप का इस्तेमाल गांवों में काम करने वाले सामुदायिक कार्यकर्ता करेंगे, जिससे वे मौके पर ही सभी गतिविधियों और वित्तीय जानकारी को डिजिटल रूप से दर्ज कर सकेंगे।
महिला उद्यमियों के लिए शुरू हुआ SHE-LEAPS
सरकार ने हाल ही में SHE-LEAPS (Self-Help Entrepreneur-Livelihoods and Enterprise Application for Prosperity and Sustainability) नाम का नया डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है। इसे 29 जून 2026 को शुरू किया गया और यह भी LokOS के तहत ही काम करेगा।
यह प्लेटफॉर्म ग्रामीण महिलाओं को अपना कारोबार शुरू करने, उसका प्रबंधन करने और कारोबार की प्रगति पर नजर रखने में मदद करेगा। इसमें खेती और गैर-कृषि दोनों तरह के उद्यमों को शामिल किया गया है।
LokOS की प्रमुख सुविधाएं
LokOS के जरिए स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों और क्लस्टर फेडरेशन का ऑनलाइन पंजीकरण किया जा सकता है। प्रत्येक सदस्य और संगठन को आधार और बैंक खाते से जुड़ी डिजिटल पहचान मिलेगी।
इस प्लेटफॉर्म पर बचत, ऋण, भुगतान और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे। साथ ही आजीविका से जुड़ी जानकारी भी दर्ज होगी, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने में आसानी होगी।
इसके अलावा अधिकारियों को रियल टाइम डैशबोर्ड और रिपोर्ट भी उपलब्ध होंगी, जिससे योजनाओं की निगरानी और बेहतर तरीके से की जा सकेगी।
देशभर में तेजी से बढ़ रहा है LokOS का दायरा
सरकार के अनुसार LokOS का विस्तार देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, 762 जिलों, 7,241 विकासखंडों, 2.57 लाख ग्राम पंचायतों और 5.92 लाख गांवों तक हो चुका है।
इस प्लेटफॉर्म से अब तक 94.16 लाख स्वयं सहायता समूह, 5.62 लाख ग्राम संगठन, 34,314 क्लस्टर लेवल फेडरेशन और 10.03 करोड़ महिला सदस्य जुड़ चुकी हैं।
लखपति दीदी योजना को भी मिलेगा लाभ
LokOS प्लेटफॉर्म लखपति दीदी योजना को भी मजबूत आधार प्रदान करेगा। इसके जरिए संभावित लाभार्थियों की पहचान, प्रशिक्षण और उनकी प्रगति की डिजिटल निगरानी की जा सकेगी।
सरकार के अनुसार इस प्लेटफॉर्म पर 3.87 करोड़ संभावित लखपति दीदी, 4.09 लाख सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (CRP) और 6,611 मास्टर ट्रेनर जुड़े हुए हैं। इसके अलावा 18.50 करोड़ डिजिटल आजीविका रजिस्टर भी तैयार किए जा चुके हैं।
ग्रामीण भारत को डिजिटल और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम
केंद्र सरकार का मानना है कि LokOS केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में पारदर्शिता, बेहतर वित्तीय प्रबंधन और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम है।
इस प्लेटफॉर्म से स्वयं सहायता समूहों का कामकाज आसान होगा, सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा और गांवों में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी। इससे महिलाओं की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।
