नई दिल्ली: बिजली मंत्रालय ने पावर सेक्टर में “मेक इन इंडिया” को बढ़ावा देने के तहत एचवीडीसी (HVDC) सबस्टेशन परियोजनाओं के लिए स्थानीय सामग्री (Local Content) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। 30 अप्रैल को जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, अब 2035 तक चरणबद्ध से न्यूनतम 60 प्रतिशत स्थानीय सामग्री सुनिश्चित की जाएगी।
पहले के नियमों में बदलाव, अब चरणबद्ध वृद्धि का प्रावधान
मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा कि पहले जहां 60 प्रतिशत स्थानीय सामग्री का एक समान नियम लागू था, वहीं अब इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा। यह बदलाव इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) या टर्नकी प्रोजेक्ट्स पर लागू होगा।
नई समयसीमा के अनुसार स्थानीय सामग्री का लक्ष्य
संशोधित नियमों के तहत एचवीडीसी सबस्टेशन (LCC टाइप) में स्थानीय सामग्री की न्यूनतम सीमा अलग-अलग चरणों में तय की गई है। 31 मार्च 2028 तक 30 प्रतिशत, 1 अप्रैल 2028 से 31 मार्च 2030 तक 40 प्रतिशत, 1 अप्रैल 2030 से 31 मार्च 2032 तक 50 प्रतिशत और अंततः 1 अप्रैल 2032 से 31 मार्च 2035 तक 60 प्रतिशत स्थानीय सामग्री अनिवार्य होगी।
पब्लिक प्रोक्योरमेंट नीति के तहत लागू होंगे नियम
यह बदलाव पब्लिक प्रोक्योरमेंट (प्रेफरेंस टू मेक इन इंडिया) नीति के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देना और सरकारी खरीद में स्थानीय कंपनियों को प्राथमिकता देना है।
घरेलू उद्योग को मिलेगा समय और बढ़ेगी क्षमता
मंत्रालय के अनुसार, यह चरणबद्ध योजना घरेलू उद्योग को अपनी क्षमता बढ़ाने का पर्याप्त समय देगी। साथ ही, यह कदम देश में उच्च मूल्य वाली पावर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में स्थानीयकरण को मजबूती देगा।
अन्य प्रावधान यथावत
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश के अलावा बाकी सभी प्रावधान पहले की तरह ही लागू रहेंगे। यह निर्णय सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के बाद लिया गया है।
