नई दिल्ली. राज्यसभा में हरिवंश को लगातार तीसरी बार उपसभापति चुना गया। उन्हें निर्विरोध (unopposed) चुना गया, जिससे सदन में सर्वसम्मति और सहयोग की भावना दिखाई दी। उनके पिछले कार्यकाल के समाप्त होने के बाद यह पद खाली हो गया था। उन्हें द्रौपदी मुर्मू द्वारा राज्यसभा के लिए नामित किया गया था, जो पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने से खाली हुई सीट के कारण संभव हुआ।
सभी दलों का समर्थन मिला
राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने हरिवंश के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी दलों का समर्थन मिला। अपने संबोधन में हरिवंश ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद और बहस जरूरी हैं, लेकिन सदन में व्यवधान (disruption) का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि संविधान, नियमों और परंपराओं के तहत वह सदन की गरिमा बनाए रखने और सभी सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करेंगे।
नरेंद्र मोदी ने हरिवंश को बधाई देते हुए कही ये बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश को बधाई देते हुए कहा कि उनके अनुभव और नेतृत्व ने सदन को अधिक प्रभावी और परिपक्व बनाया है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके नए कार्यकाल में भी सदन की गरिमा और कार्यक्षमता और मजबूत होगी।
वहीं, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि वे विपक्ष को पर्याप्त समय और अवसर देंगे। उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद 2019 से खाली है।
अन्य नेताओं ने भी हरिवंश के संतुलित और निष्पक्ष रवैये की सराहना की। तिरुचि शिवा ने उम्मीद जताई कि वे अपने कार्यकाल में निष्पक्षता बनाए रखेंगे, जबकि संदोष कुमार ने उन्हें अनुभवी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित नेता बताया।
हरिवंश ने सभी सदस्यों, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेताओं का आभार जताते हुए कहा कि वह सदन को सुचारू और गरिमापूर्ण ढंग से चलाने के लिए पूरी निष्ठा से काम करेंगे।
