नई दिल्ली. राजस्थान में पंचायत और शहरी निकाय चुनाव (Rajasthan Panchayat and Urban Local Body Elections) समय पर नहीं कराए जाने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। चुनाव निर्धारित समय सीमा तक नहीं होने पर राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) के खिलाफ दायर अवमानना याचिकाओं पर अदालत ने सुनवाई की। मामला न्यायमूर्ति इंदरजीत सिंह की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष है।
हाईकोर्ट ने 31 जुलाई तक चुनाव कराने का दिया था निर्देश
इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि 31 जुलाई तक सभी पंचायत और शहरी निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जाए। लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर चुनाव कराना संभव नहीं होगा।
इसी कारण पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिरराज सिंह देवांडा सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने अदालत में अवमानना याचिकाएं (Contempt Petitions) दायर की हैं। उनका कहना है कि अदालत के आदेश का पालन नहीं किया गया है।
सरकार ने दिसंबर तक का समय मांगा
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि दिसंबर से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है। सरकार का कहना है कि चुनाव कराने से पहले कई प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी जरूरी हैं।
सरकार ने अदालत को बताया कि ओबीसी आयोग (OBC Commission) की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इसके अलावा चुनाव की तैयारियां, मतदाता सूची और अन्य प्रशासनिक कार्य भी अभी पूरे नहीं हुए हैं। सरकार ने यह भी कहा कि कई पंचायत समितियों का कार्यकाल वर्ष के अंत में समाप्त हो रहा है, इसलिए चुनाव एक साथ कराना अधिक व्यावहारिक होगा।
राज्य निर्वाचन आयोग ने भी बताई समय की जरूरत
राज्य निर्वाचन आयोग ने भी अदालत को बताया कि चुनाव की पूरी प्रक्रिया पूरी करने में कम से कम 90 दिन का समय लगेगा। आयोग के अनुसार वर्तमान स्थिति को देखते हुए पंचायत और निकाय चुनाव सितंबर से नवंबर के बीच ही कराए जा सकते हैं।
हाईकोर्ट की नजर अगली सुनवाई पर
अब राजस्थान हाईकोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि पहले दिए गए आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ और क्या सरकार तथा राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से बताई गई वजहें पर्याप्त हैं। अदालत की अगली सुनवाई में इस मामले पर आगे के निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे राज्य में स्थानीय निकायों के चुनाव कार्यक्रम और प्रशासनिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
