नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को शिपिंग गतिविधियों के लिए बंद करने की घोषणा ने वैश्विक व्यापार जगत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस घटनाक्रम का असर भारत के बासमती चावल (Basmati Rice Export) और चाय निर्यात (Tea Export) पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
निर्यात क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो भारतीय कृषि निर्यात को बड़ा झटका लग सकता है। खासतौर पर बासमती चावल की कीमतों में 5 से 10 प्रतिशत तक गिरावट आने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
60 हजार टन बासमती चावल की खेप फंसी चिंता का कारण
रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 60,000 टन बासमती चावल इस समय पश्चिम एशियाई देशों के लिए भेजा जा चुका है और समुद्री मार्ग में है। ऐसे में शिपिंग बाधित होने की स्थिति में इन खेपों की डिलीवरी प्रभावित हो सकती है।
भारत के प्रमुख Basmati Rice Export Market में सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यमन शामिल हैं। ये देश भारतीय बासमती चावल के कुल निर्यात का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा खरीदते हैं।
भारत में हर वर्ष लगभग 72 लाख टन बासमती चावल का उत्पादन होता है, जिसमें से करीब 60 लाख टन वैश्विक बाजारों में निर्यात किया जाता है। ऐसे में मध्य-पूर्व के बाजारों में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर किसानों, व्यापारियों और निर्यातकों पर पड़ सकता है।
पहले बढ़े थे दाम, अब गिरावट का खतरा
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते की खबरों के बाद निर्यातकों ने Middle East Market के लिए खरीद बढ़ा दी थी। इससे बासमती चावल की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक तेजी देखने को मिली थी।
हालांकि अब होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी अनिश्चितता के कारण बाजार का रुख बदलता नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात प्रभावित होता है तो घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर दबाव बन सकता है।
भारतीय चाय उद्योग पर भी मंडरा रहा संकट
सिर्फ बासमती चावल ही नहीं, भारतीय Tea Industry भी इस संकट से प्रभावित हो सकती है। पश्चिम एशिया भारतीय चाय के सबसे महत्वपूर्ण निर्यात बाजारों में शामिल है।
विशेष रूप से Indian Orthodox Tea और Premium Second Flush Tea की इस क्षेत्र में अच्छी मांग रहती है। हर साल मई के अंत से ऑर्डर मिलने शुरू होते हैं और जून से बड़े पैमाने पर शिपमेंट शुरू हो जाता है।
उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार वर्ष 2025 में भारत का चाय निर्यात रिकॉर्ड 28.5 करोड़ किलोग्राम तक पहुंच गया था। लेकिन वर्तमान संकट ने Tea Export Sector के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
बढ़ा Freight Cost, प्रभावित हो रहा Export Business
निर्यातकों का कहना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में संभावित अवरोध और Red Sea Route पर बढ़े मालभाड़े (Freight Charges) के कारण निर्यात लागत में भारी वृद्धि हो रही है।
भारतीय चाय और बासमती चावल का लगभग 50 प्रतिशत निर्यात पश्चिम एशिया के देशों में होता है। ऐसे में शिपिंग लागत बढ़ने और मार्ग बाधित होने का सीधा असर Export Business पर पड़ सकता है।
किसानों और व्यापारियों के लिए क्यों अहम है यह संकट?
यदि यह भू-राजनीतिक संकट लंबा खिंचता है तो इसके कई आर्थिक प्रभाव सामने आ सकते हैं:
बासमती चावल की कीमतों में गिरावट
चाय निर्यात में कमी
शिपिंग लागत में वृद्धि
किसानों की आय पर दबाव
निर्यातकों की लागत बढ़ना
वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होना
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यदि यहां लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो भारतीय कृषि निर्यात क्षेत्र को बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है।
फिलहाल किसान, निर्यातक और व्यापारिक संगठन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और सरकार से आवश्यक हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं।

