नई दिल्ली. केंद्र सरकार देश के किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए हर साल 22 अधिसूचित कृषि फसलों के लिए Minimum Support Price यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करती है। सरकार ने वर्ष 2018-19 के केंद्रीय बजट में MSP तय करने के लिए एक महत्वपूर्ण सिद्धांत घोषित किया था। इसके तहत किसानों को उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना MSP देने का प्रावधान किया गया। इसी नीति के तहत वर्ष 2018-19 से सभी अधिसूचित खरीफ, रबी और अन्य वाणिज्यिक फसलों के MSP में बढ़ोतरी की जा रही है।
उत्पादन लागत से कम से कम 50 फीसदी अधिक MSP
सरकार के मुताबिक, सभी अधिसूचित फसलों के MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक रखा गया है। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी फसल की लागत के मुकाबले बेहतर रिटर्न उपलब्ध कराना और खेती को आर्थिक रूप से अधिक टिकाऊ बनाना है।
हालांकि, सरकार पूरी फसल की खरीद नहीं करती। कुल उत्पादन में से जितनी मात्रा बाजार में बेचने योग्य यानी Marketable Surplus होती है, वही सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद के लिए उपलब्ध होती है। जब किसी फसल का बाजार मूल्य MSP से नीचे चला जाता है, तब किसानों को मूल्य समर्थन देने के लिए सरकारी खरीद की जाती है।
अनाज और मोटे अनाज की खरीद कैसे होती है?
सरकार गेहूं, धान जैसे अनाज और मोटे अनाज की खरीद Food Corporation of India यानी FCI तथा संबंधित राज्य सरकारों की नामित एजेंसियों के माध्यम से करती है। इसका उद्देश्य बाजार में कीमतों में गिरावट आने पर किसानों को MSP के अनुरूप मूल्य उपलब्ध कराना है।
वहीं, दलहन, तिलहन और खोपरा की खरीद Pradhan Mantri Annadata Aay Sanrakshan Abhiyan यानी PM-AASHA के Price Support Scheme के तहत की जाती है। इसके लिए संबंधित राज्य सरकार की मांग और योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार खरीद की जाती है।
तूर, उड़द और मसूर की MSP पर खरीद
देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने ‘Mission for Aatmanirbharta in Pulses’ शुरू किया है, जिसे 2030-31 तक लागू किया जाना है। इसका लक्ष्य देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है।
इस मिशन के तहत सरकार PM-AASHA के जरिए तूर, उड़द और मसूर की खरीद को बढ़ावा दे रही है। केंद्रीय नोडल एजेंसियां NAFED और NCCF राज्य सरकारों के अनुरोध पर पहले से पंजीकृत किसानों से उनकी पेशकश के अनुसार इन फसलों की खरीद करती हैं। इससे किसानों को MSP का लाभ दिलाने और देश में दलहन उत्पादन को प्रोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है।
कपास और जूट की भी MSP पर खरीद
कपास और जूट जैसी फसलों की सरकारी खरीद भी MSP पर की जाती है। कपास की खरीद Cotton Corporation of India यानी CCI और जूट की खरीद Jute Corporation of India यानी JCI के माध्यम से होती है।
सरकार का प्रयास है कि अलग-अलग कृषि उपज के लिए उनकी प्रकृति और बाजार की स्थिति के अनुसार खरीद व्यवस्था उपलब्ध रहे, ताकि किसानों को बाजार में कीमत गिरने की स्थिति में सुरक्षा मिल सके।
किसानों की सुविधा के लिए खोले जाते हैं खरीद केंद्र
फसल खरीद के लिए पर्याप्त संख्या में Procurement Centres खोले जाते हैं। इन केंद्रों की संख्या तय करते समय फसल का उत्पादन, बाजार में बिक्री योग्य अतिरिक्त उपज, किसानों की सुविधा और Storage तथा Transportation जैसी सुविधाओं को ध्यान में रखा जाता है।
जरूरत पड़ने पर मौजूदा मंडियों, डिपो और गोदामों के अलावा Temporary Purchase Centres भी बनाए जाते हैं। सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में MSP Procurement Process में लगातार सुधार किया गया है, जिससे किसानों को भुगतान सीधे उनके Bank Accounts में किया जा सके।
आधार और जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ी व्यवस्था
MSP खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए राज्यों के Procurement Portals पर किसानों के Aadhaar और Land Records को जोड़ा जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि सरकारी खरीद का लाभ सीधे वास्तविक किसानों तक पहुंचे।
सरकार के अनुसार, Direct Bank Transfer के जरिए किसानों के खाते में MSP का भुगतान करने की व्यवस्था ने खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया है।
खराब होने वाली फसलों के लिए भी सरकार की योजना
सभी कृषि और बागवानी फसलें Price Support Scheme के दायरे में नहीं आतीं। खासकर जल्दी खराब होने वाली फसलों के उत्पादकों को बाजार में अचानक कीमत गिरने पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति से किसानों को बचाने के लिए सरकार PM-AASHA के तहत Market Intervention Scheme यानी MIS लागू करती है।
इस योजना का उद्देश्य bumper crop के समय बाजार में कीमतें बहुत नीचे जाने पर किसानों को distress sale से बचाना है। यदि किसी फसल की मौजूदा बाजार कीमत पिछले सामान्य वर्ष की तुलना में कम से कम 10 प्रतिशत गिर जाती है, तो राज्य या केंद्र शासित प्रदेश सरकार के अनुरोध पर योजना लागू की जा सकती है।
किसानों को सीधे कीमत के अंतर का भुगतान
वर्ष 2024-25 के सीजन से Market Intervention Scheme में Price Differential Payment यानी PDP का नया प्रावधान भी जोड़ा गया है। इसके तहत खराब होने वाली फसलों के किसानों को Market Intervention Price और वास्तविक Selling Price के बीच के अंतर का सीधे भुगतान किया जा सकता है।
राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को यह विकल्प दिया गया है कि वे फसल की Physical Procurement करें या किसानों को MIP और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर भुगतान करें।
टमाटर, प्याज और आलू की ढुलाई पर भी मदद
सरकार ने 2024-25 सीजन से MIS में TOP यानी Tomato, Onion and Potato फसलों के लिए एक और प्रावधान जोड़ा है। इसके तहत किसानों के हित में उत्पादन वाले राज्यों से उपभोग वाले राज्यों तक इन फसलों को पहुंचाने के लिए Storage और Transportation Cost की प्रतिपूर्ति की जाती है।
इसका उद्देश्य उत्पादन वाले क्षेत्रों में अधिक आवक के कारण कीमतों में गिरावट और दूसरे राज्यों में ऊंची कीमतों के बीच संतुलन बनाने में मदद करना है।
MSP खरीद में पिछले वर्षों में हुआ बड़ा इजाफा
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, MSP के तहत 22 फसलों की कुल सरकारी खरीद में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2004-14 के दौरान इन 22 फसलों की कुल खरीद 6,987 लाख मीट्रिक टन थी, जो वर्ष 2014-26 में बढ़कर जून 2026 तक 12,819 लाख मीट्रिक टन हो गई।
इसी अवधि में किसानों को MSP के रूप में किए गए भुगतान में भी बड़ा इजाफा हुआ है। वर्ष 2004-14 में किसानों को MSP के तहत कुल 7.41 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, जबकि वर्ष 2014-26 में जून 2026 तक यह राशि बढ़कर 27.80 लाख करोड़ रुपये हो गई।
पांच साल में 14.58 लाख करोड़ रुपये का MSP भुगतान
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान 22 MSP फसलों के तहत कुल 5,781 लाख मीट्रिक टन की खरीद हुई। इस अवधि में किसानों को कुल 14.58 लाख करोड़ रुपये का MSP Value भुगतान किया गया।
सरकार का कहना है कि MSP में बढ़ोतरी और खरीद व्यवस्था में सुधार से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में मदद मिली है।
खेती को मजबूत बनाने के लिए कई योजनाओं पर जोर
सरकार केवल MSP और सरकारी खरीद के जरिए ही किसानों की आय बढ़ाने पर जोर नहीं दे रही है। कृषि उत्पादकता बढ़ाने, खेती की लागत कम करने, Crop Diversification को बढ़ावा देने और किसानों को लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं और सुधार लागू किए जा रहे हैं।
इनमें कृषि ऋण, फसल बीमा, आय सहायता, सिंचाई, बीज, कृषि मशीनीकरण, कृषि विपणन, जैविक और प्राकृतिक खेती, किसान सामूहिकता, कृषि अवसंरचना और डिजिटल कृषि जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
सरकार का प्रयास है कि कृषि क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं को एक व्यापक व्यवस्था के तहत लागू किया जाए, ताकि किसानों को उत्पादन से लेकर बाजार और फसल बिक्री तक हर चरण में सहायता मिल सके। MSP, सरकारी खरीद, आय समर्थन और कृषि सुधारों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने तथा देश के कृषि क्षेत्र को अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

