नई दिल्ली. अगर आप पेट्रोल पंप से एक लीटर पेट्रोल खरीदते हैं, तो उसमें कितनी मात्रा में Ethanol मिला है, इसकी जानकारी अभी अनिवार्य रूप से नहीं दी जाएगी। Supreme Court ने पेट्रोल में मौजूद Ethanol की सटीक मात्रा की जानकारी पेट्रोल पंप पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने की मांग वाली PIL पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत संबंधित सक्षम प्राधिकारी और संबंधित High Court के सामने रखने की अनुमति दी गई है।
क्या चाहती थी याचिका?
अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से दायर याचिका में पेट्रोल पंप के dispensing nozzles पर एक समान तरीके से Ethanol percentage बताने वाले लेबल लगाने की मांग की गई थी। इसके अलावा पेट्रोल की bills और receipts पर भी पेट्रोल में मौजूद Ethanol की मात्रा छापने का अनुरोध किया गया था। याचिका में अलग-अलग वाहनों के लिए एक database तैयार करने की मांग भी की गई थी, जिसमें यह बताया जाए कि कौन-सा petrol-ethanol blend किस make, model, engine type और manufacturing year वाले वाहन के लिए उपयुक्त है।
Supreme Court ने क्या कहा?
Justices MM Sundresh और PB Varale की bench ने इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि उसकी मांग सरकार की E20 policy को चुनौती देने की नहीं है। उसका कहना था कि consumers को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि वे fuel station से किस प्रकार का petrol खरीद रहे हैं और उसमें Ethanol की कितनी मात्रा मौजूद है। हालांकि, Supreme Court ने Article 32 के तहत इस PIL को entertain करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को संबंधित competent authority तथा High Court का रुख करने को कहा।
क्या है E20 Petrol?
E20 Petrol में 20 प्रतिशत Ethanol और 80 प्रतिशत petrol होता है। सरकार का Ethanol Blending Programme देश की imported crude oil पर निर्भरता कम करने, emissions घटाने और घरेलू स्तर पर उत्पादित biofuel के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
E20 Fuel को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?
E20 fuel के बढ़ते इस्तेमाल के साथ vehicle owners के बीच इसके असर को लेकर कई सवाल भी उठे हैं। खासकर पुराने वाहनों में higher ethanol blends की compatibility को लेकर चिंता जताई जाती रही है। इसके अलावा mileage, fuel-system corrosion और लंबे समय में vehicle maintenance पर संभावित प्रभाव जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहे हैं। सरकार की ओर से पहले कहा जा चुका है कि किसी वाहन का mileage केवल fuel पर निर्भर नहीं करता, बल्कि driving habits, traffic, vehicle maintenance, tyre pressure और air-conditioner के इस्तेमाल जैसे कई factors भी इसमें भूमिका निभाते हैं।
Auto Industry ने भी बदला अपना रुख
E20 को लेकर जारी बहस के बीच auto industry body SIAM ने इस महीने की शुरुआत में contaminated ethanol-blended fuel से संभावित vehicle damage को लेकर अपनी पहले की warning वापस ले ली और data को revise करने की बात कही। दूसरी ओर, सरकारी oil companies का कहना है कि उनके परीक्षणों में E20 petrol निर्धारित quality standards के अनुरूप पाया गया है।
Food vs Fuel Debate भी तेज
Ethanol production के लिए sugar और corn जैसी फसलों के इस्तेमाल को लेकर Food vs Fuel debate भी सामने आई है। हाल में sugar prices में बढ़ोतरी के बीच इस मुद्दे पर सवाल उठे हैं कि क्या खाद्य जरूरतों वाली फसलों को fuel production की ओर मोड़ने से food supply पर असर पड़ सकता है। Experts का एक वर्ग 2G Ethanol को विकल्प मानता है, जिसमें agricultural waste और biomass residues का इस्तेमाल fuel बनाने के लिए किया जा सकता है।
आने वाले समय में बढ़ेगी Ethanol की भूमिका
दुनिया के कई देशों में अब ऐसे fuels को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है, जो food crops के साथ सीधी प्रतिस्पर्धा न करें और agricultural residues तथा waste biomass का बेहतर इस्तेमाल करें। ऐसे में भारत में भी Ethanol Blending Programme के विस्तार के साथ fuel transparency, vehicle compatibility और food security जैसे मुद्दे आने वाले समय में महत्वपूर्ण बने रह सकते हैं।
