नई दिल्ली. देश में किसानों को Sustainable Farming और Soil Health के प्रति जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने किसानों से महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने कहा कि खेतों में जरूरत से ज्यादा Fertilizer और रासायनिक खाद का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। बेहतर उत्पादन और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए Soil Testing के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करना सबसे प्रभावी तरीका है।
उन्होंने कहा कि धरती मां किसानों की सबसे बड़ी पूंजी है और इसकी सेहत को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है। यदि मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो फसल उत्पादन भी बेहतर होगा और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
Soil Testing के आधार पर करें खाद का उपयोग
कृषि मंत्री ने कहा कि कई किसान बिना जांच कराए या दूसरों की नकल करते हुए खेतों में खाद डालते हैं, जिससे मिट्टी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है। Soil Test Report से यह पता चलता है कि खेत में कौन-कौन से पोषक तत्व मौजूद हैं और किनकी कमी है।
मिट्टी की जांच के बाद किसान सही मात्रा में Nitrogen, Phosphorus, Potash और अन्य आवश्यक तत्वों का उपयोग कर सकते हैं। इससे खेती की लागत कम होती है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
अधिक Fertilizer मिट्टी को पहुंचा सकता है नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार जरूरत से अधिक रासायनिक खाद का उपयोग लंबे समय में मिट्टी की उर्वरता को प्रभावित कर सकता है। शुरुआत में उत्पादन बढ़ने का आभास हो सकता है, लेकिन लगातार अधिक खाद डालने से मिट्टी की जैविक क्षमता कमजोर होने लगती है।
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि भूमि को सुरक्षित रखना जरूरी है। इसके लिए संतुलित पोषण प्रबंधन और वैज्ञानिक खेती को अपनाना समय की मांग है।
Healthy Soil से मिलेगी Better Crop Yield
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ मिट्टी ही बेहतर उत्पादन की आधारशिला है। Soil Health Management, जैविक खाद का उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी जमीन की उत्पादकता लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं।
‘खेत बचाओ अभियान’ का मुख्य उद्देश्य भी किसानों को यही संदेश देना है कि मिट्टी की सेहत सुधरेगी तो खेती अधिक लाभकारी बनेगी और किसानों की आमदनी में स्थायी वृद्धि होगी।
Soil Testing कैसे कराएं?
किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच बेहद आसान प्रक्रिया के जरिए करा सकते हैं।
मिट्टी का नमूना लेने का तरीका
खेत के अलग-अलग हिस्सों से मिट्टी के नमूने लें।
ऊपर की घास, पत्तियां और कचरा हटाने के बाद 15 से 20 सेंटीमीटर गहराई से मिट्टी निकालें।
सभी नमूनों को मिलाकर एक प्रतिनिधि नमूना तैयार करें।
नमूने को साफ और सूखे बैग में भरें।
कहां कराएं Soil Test?
किसान निम्न स्थानों पर मिट्टी की जांच करा सकते हैं-
Krishi Vigyan Kendra (KVK)
कृषि विभाग की Soil Testing Laboratory
Soil Health Card Centers
मान्यता प्राप्त कृषि प्रयोगशालाएं
Soil Health Report में क्या जानकारी मिलती है?
जांच के बाद किसानों को एक विस्तृत Soil Health Report दी जाती है, जिसमें निम्न जानकारी शामिल होती है
Nitrogen (नाइट्रोजन)
Phosphorus (फास्फोरस)
Potash (पोटाश)
Soil pH Level
Organic Carbon
सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता
इसी रिपोर्ट के आधार पर किसानों को यह सलाह दी जाती है कि उन्हें कौन-सी खाद कितनी मात्रा में उपयोग करनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि Soil Testing, Balanced Fertilizer Use, Soil Health Card और Sustainable Agriculture जैसी पहलें भविष्य की खेती को अधिक लाभदायक और पर्यावरण अनुकूल बना सकती हैं। किसानों को बिना जांच के खाद डालने के बजाय वैज्ञानिक तरीके अपनाने चाहिए, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और फसल उत्पादन में निरंतर वृद्धि हो सके।
