नई दिल्ली: लोकसभा ने संविधान (एक सौ तैंतीसवां संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 और केंद्रशासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025 पर गठित संयुक्त समिति की रिपोर्ट पेश करने की समयसीमा बढ़ा दी है। अब यह रिपोर्ट इस वर्ष के मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक प्रस्तुत की जा सकेगी।
गिरफ्तार जनप्रतिनिधियों के पद पर बने रहने को लेकर प्रस्तावित प्रावधान
इन तीनों विधेयकों का उद्देश्य ऐसे प्रावधान लागू करना बताया जा रहा है, जिनके तहत गिरफ्तार होकर जेल में बंद कोई भी व्यक्ति प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या केंद्र/राज्य सरकार में मंत्री के रूप में कार्य नहीं कर सकेगा। प्रस्तावों के अनुसार, किसी भी आरोपी जनप्रतिनिधि को गिरफ्तारी के 30 दिनों के भीतर जमानत हासिल करनी होगी।
30 दिन में जमानत नहीं मिली तो पद छोड़ना होगा
यदि संबंधित नेता 30 दिनों के भीतर जमानत लेने में असफल रहता है, तो 31वें दिन प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को उसे मंत्रिमंडल से हटाना होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो कानून के तहत वह व्यक्ति स्वतः ही अपने पद पर बने रहने के लिए अयोग्य माना जाएगा।
राजनीतिक जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम
इन प्रस्तावित संशोधनों को राजनीतिक जवाबदेही, पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, इन विधेयकों पर अंतिम निर्णय संयुक्त समिति की रिपोर्ट और संसद में आगे होने वाली चर्चा के बाद ही होगा।
