नई दिल्ली. नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 में यह स्पष्ट हुआ कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत की न्यायिक और कानूनी प्रणाली में तेज़ी से बदलाव ला रहा है। सम्मेलन में लीगल टेक स्टार्टअप, न्यायविद, नीति-निर्माता और टेक विशेषज्ञ शामिल हुए, जिन्होंने न्याय प्रणाली में तकनीक के बढ़ते उपयोग पर चर्चा की।
कानूनी शोध और केस मैनेजमेंट में बदलाव
एआई आधारित टूल अब:
हजारों पन्नों के केस डेटा का कुछ ही मिनटों में विश्लेषण कर सकते हैं
प्रासंगिक नज़ीर (precedents) खोजने में मदद करते हैं
कानूनी दस्तावेजों की ड्राफ्टिंग और समीक्षा को स्वचालित बनाते हैं
क्लाइंट प्रश्नों के लिए चैटबॉट आधारित सहायता प्रदान करते हैं
ई-डिस्कवरी और कंप्लायंस प्रक्रियाओं को तेज़ बनाते हैं
इससे वकीलों और लॉ फर्मों का समय बच रहा है और लंबित मामलों के प्रबंधन में भी सुधार हो रहा है।
स्टार्टअप्स की भूमिका
समिट में लीगल टेक कंपनियों ने अपने नवाचार प्रस्तुत किए। Lexlegis.ai के मैनेजिंग डायरेक्टर साकार एस यादव ने बताया कि उनका एआई उत्पाद कानूनी दस्तावेजों की ड्राफ्टिंग को अधिक सटीक, तेज़ और त्रुटिरहित बनाने में सक्षम है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के मंच नवाचार को बढ़ावा देते हैं और स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi का आभार व्यक्त किया।
न्याय प्रणाली में संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, एआई के उपयोग से:
अदालतों में लंबित मामलों को कम करने में मदद मिल सकती है
न्याय तक पहुंच (Access to Justice) आसान हो सकती है
छोटे वकीलों और ग्रामीण क्षेत्रों को डिजिटल सहायता मिल सकती है
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ सकती है
हालांकि, डेटा गोपनीयता, एल्गोरिदमिक पारदर्शिता और नैतिक उपयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। समिट ने यह संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में एआई भारत की न्यायिक प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बन सकता है, जिससे कानूनी सेवाएं अधिक तेज़, सुलभ और प्रभावी होंगी।
