नई दिल्ली. भारत सरकार ने 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं और अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी है। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक होने के नाते यह कदम घरेलू किसानों को समर्थन देने और बाजार को संतुलित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सरकार ने बयान में कहा कि मौजूदा आपूर्ति और कीमतों की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है, ताकि घरेलू बाजार स्थिर रहे और किसानों को बेहतर वित्तीय लाभ मिल सके।
पहले भी दी गई थी आंशिक अनुमति
पिछले महीने सरकार ने 5 लाख टन गेहूं के आटे और अन्य गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी। इससे पहले नवंबर में 15 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी गई थी, जो 1 अक्टूबर से शुरू हुए सीजन के लिए थी।
व्यापारियों की राय
व्यापारियों का मानना है कि निर्यात की अनुमति से घरेलू बाजार में सकारात्मक माहौल बनेगा, लेकिन तय मात्रा को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
गुरुग्राम स्थित कमोडिटी ब्रोकरेज कंपनी Waseda Global के सीईओ सुमित गुप्ता के अनुसार, भारतीय गेहूं की ऊंची कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा को कठिन बना सकती है।
भारतीय गेहूं की कीमत लगभग 280 डॉलर प्रति टन (FOB)
अर्जेंटीना का गेहूं लगभग 200 डॉलर प्रति टन
बांग्लादेश लगभग 260 डॉलर प्रति टन (C&F) पर बेहतर गुणवत्ता वाला गेहूं खरीद रहा है
2022 से लगा था निर्यात प्रतिबंध
भारत ने 2022 में भीषण गर्मी के कारण गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। 2023 और 2024 में भी फसल प्रभावित होने से भंडार घटे और घरेलू कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं। यहां तक कि 2017 के बाद पहली बार गेहूं आयात की संभावना पर भी चर्चा होने लगी थी।
बेहतर मौसम से उत्पादन में बढ़ोतरी
हालांकि पिछले वर्ष बेहतर मौसम, जलवायु-प्रतिरोधी बीजों के उपयोग और लगातार दो अच्छे मानसून के कारण उत्पादन में सुधार हुआ। 2025 में भारत ने रिकॉर्ड 117.9 मिलियन मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन किया, जिससे इस साल भी मजबूत फसल की उम्मीद बढ़ गई है। सरकार का मानना है कि मौजूदा स्थिति में सीमित निर्यात की अनुमति से किसानों को फायदा मिलेगा और घरेलू बाजार भी संतुलित रहेगा।
