नई दिल्ली. नई दिल्ली में विपक्षी गठबंधन INDIA Bloc के 10 नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को राष्ट्रपति Droupadi Murmu से मुलाकात कर चार प्रमुख मांगों वाला ज्ञापन सौंपा। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) Gyanesh Kumar के इस्तीफे, मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) पर रोक लगाने, बैलेट पेपर से चुनाव कराने और पिछले दो वर्षों में जिन विधानसभा चुनावों में विपक्ष ने कथित ‘Vote Chori’ के सबूत होने का दावा किया है, उन्हें रद्द करने की मांग शामिल है। मुलाकात के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने दावा किया कि राष्ट्रपति ने विपक्षी नेताओं से कथित ‘वोट चोरी’ के सबूत मांगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपने पास मौजूद साक्ष्य राष्ट्रपति को सौंपने के लिए तैयार है।
राष्ट्रपति भवन तक मार्च के दौरान पुलिस ने रोका
राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से Rashtrapati Bhavan की ओर मार्च निकाला। हालांकि, पुलिस ने उन्हें Vijay Chowk के पास रोक दिया। इसके बाद कई नेताओं ने वहीं बैठकर विरोध प्रदर्शन किया, जबकि 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिलने के लिए आगे बढ़ा।
इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख Mamata Banerjee, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah, NCP (SP) की नेता Supriya Sule, RJD सांसद Manoj Jha, VCK प्रमुख Thol Thirumavalavan, IUML नेता E. T. Mohammed Basheer, CPI(M) महासचिव M. A. Baby और CPI महासचिव D. Raja शामिल थे।
INDIA Bloc की चार प्रमुख मांगें क्या हैं?
राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में विपक्षी गठबंधन ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग की। पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के इस्तीफे की है। इसके साथ ही विपक्ष ने 2023 के उस कानून को निरस्त करने की मांग की, जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को पद से हटने के बाद आजीवन कानूनी संरक्षण मिलने का प्रावधान बताया गया है।
दूसरी मांग देशभर में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को तत्काल रोकने और विपक्ष के मुताबिक मतदाता सूची से हटाए गए 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल करने की है। तीसरी मांग सभी चुनावों में Electronic Voting Machines (EVM) के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने की है। चौथी मांग पिछले दो वर्षों में हुए उन विधानसभा चुनावों को रद्द करने की है, जिनमें विपक्ष का दावा है कि ‘Vote Chori’ के निर्णायक सबूत सामने आए हैं।
ज्ञापन में कहा गया कि जब अन्य माध्यमों से समाधान नहीं मिला, तो विपक्ष ने संविधान की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं को राष्ट्रपति के सामने रखने का फैसला किया।
राहुल गांधी का दावा- राष्ट्रपति ने सबूत देने को कहा
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar ने मिलकर भारतीय लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की साजिश की है। ये राहुल गांधी के आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती।
राहुल गांधी ने दावा किया कि राष्ट्रपति ने विपक्षी नेताओं की बात सुनी और उनसे कथित ‘Election Chori’ के सबूत पेश करने को कहा। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया के स्वतंत्र और निष्पक्ष होने की बात रखेंगी, लेकिन उनके मुताबिक मुलाकात के दौरान ऐसा नहीं हुआ। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि विपक्ष के पास जो साक्ष्य हैं, उन्हें राष्ट्रपति के सामने रखा जाएगा।
कांग्रेस नेता ने आगे बताया कि INDIA Bloc सोमवार को सुप्रीम कोर्ट जाकर भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलने और उन्हें ज्ञापन सौंपने की कोशिश करेगा। विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर न्यायिक और संवैधानिक स्तर पर कार्रवाई जरूरी है।
खरगे और ममता बनर्जी ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आयोग की भूमिका कथित वोट चोरी के मामले में जांच के दायरे में होनी चाहिए। उन्होंने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई और कहा कि राष्ट्रपति ने विपक्षी नेताओं से अपने आरोपों के समर्थन में सबूत देने को कहा है।
वहीं, Mamata Banerjee ने मुलाकात के बाद कहा कि राष्ट्रपति ने विपक्ष की चिंताओं को देखने और संबंधित विवरणों की जांच करने की बात कही है। ममता बनर्जी के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा और अब अपने पास उपलब्ध साक्ष्य भी प्रस्तुत करेगा। उन्होंने INDIA Bloc की एकजुटता पर जोर देते हुए गठबंधन के जनसमर्थन को लेकर भी दावा किया।
SIR को लेकर क्यों जारी है विपक्ष का विरोध?
विपक्षी दल मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर लगातार विरोध कर रहे हैं। Special Intensive Revision यानी SIR के तहत मतदाता सूची की समीक्षा और संशोधन की प्रक्रिया को लेकर कई राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई है।
इस बीच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें ज्यादातर मामले SIR से जुड़े निर्णयों और आदेशों से संबंधित थे। इस रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने कहा था कि किसी संस्थान में विचारों और टिप्पणियों में मतभेद होना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने यह भी कहा कि उसके आदेश कानूनी रूप से वैध हैं और निर्धारित नियमों के अनुसार जारी किए जाते हैं।
लगातार तीसरे दिन जारी रहा विरोध प्रदर्शन
INDIA Bloc ने SIR विवाद को लेकर संयुक्त विरोध कार्यक्रम की योजना बनाई है। इसमें रैलियां निकालने और ‘Save Democracy’ मार्च आयोजित करने जैसे कार्यक्रम शामिल बताए गए हैं। इससे पहले गुरुवार को विपक्षी नेताओं ने Mahatma Gandhi के स्मारक Rajghat पर धरना दिया था। विपक्ष ने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाए और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने की बात कही।
फिलहाल, राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन और विपक्ष की मांगों पर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर रहेगी। विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य देने और सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की बात कह रहा है, जबकि चुनाव आयोग पहले ही अपनी प्रक्रिया और आदेशों को वैधानिक नियमों के अनुरूप बताया है।
