नई दिल्ली. नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड से पैदा हुए संकट के बीच भारत ने अपनी मानवीय सहायता और तेज कर दी है। भारत की ओर से अब तक 130 टन से अधिक राहत सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है। इसके साथ ही खोज और बचाव अभियान तथा शवों की पहचान में मदद के लिए 54 विशेषज्ञों को भी तैनात किया गया है। भारतीय दूतावास के अनुसार, 26 अगस्त 2026 से शुरू हुई राहत सहायता के तहत भारतीय वायुसेना की आठवीं उड़ान बुधवार को काठमांडू पहुंची।
आठवीं IAF Flight से पहुंची 35 टन राहत सामग्री
भारतीय वायुसेना के आठवें विमान में करीब 35 टन राहत और बचाव से जुड़ी सामग्री नेपाल भेजी गई। इस खेप के पहुंचने के साथ भारत की ओर से भेजी गई कुल राहत सामग्री 130 टन से अधिक हो गई है।
विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आठवीं उड़ान के नेपाल पहुंचने के बाद भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने राहत सामग्री नेपाल के मंत्री महावीर पुन को सौंपी। भारत लगातार नेपाल की जरूरतों के अनुसार राहत और बचाव से जुड़ा सामान उपलब्ध करा रहा है।
रेस्क्यू के लिए भेजे गए आधुनिक उपकरण
भारत ने नेपाल को सामान्य राहत सामग्री के साथ-साथ मुश्किल परिस्थितियों में बचाव अभियान चलाने के लिए विशेष तकनीकी उपकरण भी उपलब्ध कराए हैं। इनमें Mud Rescue Suits, Gas Detectors, Breathing Apparatus, Inflatable Walkways, Portable Generators, Lighting Towers और Dewatering Pumps शामिल हैं।
इन उपकरणों का इस्तेमाल बाढ़ और मलबे से प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य को सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए किया जा सकता है। खासकर सुरंग और दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों की तलाश के दौरान इन उपकरणों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
DNA Kits से शवों की पहचान में मिलेगी मदद
बाढ़ और आपदा के दौरान लापता लोगों की पहचान एक बड़ी चुनौती बन जाती है। इसे देखते हुए भारत ने नेपाल को DNA Kits, Reagents और DNA Profiling Equipment भी उपलब्ध कराया है।
इन संसाधनों की मदद से अज्ञात पीड़ितों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है। भारत की ओर से भेजे गए विशेषज्ञ फोरेंसिक ऑपरेशन में भी सहयोग कर रहे हैं, जिससे पीड़ितों की पहचान की प्रक्रिया को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
Chilime और Langtang में भारतीय विशेषज्ञों की टीम
भारत की विशेष Tunnel Rescue Team ने नेपाल सेना के साथ मिलकर शुरुआत में चिलिमे और लांगटांग के दो संवेदनशील इलाकों में संयुक्त अभियान शुरू किया था। इन स्थानों पर कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण है।
फिलहाल खोज और बचाव अभियान का मुख्य फोकस Chilime Tunnel पर है। यहां राहत टीमों को ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी क्षेत्र, सीमित पहुंच और सुरंग के अंदर मौजूद तीखी ढलान जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
भारी मशीनरी पहुंचाने के लिए बनाया जा रहा रास्ता
चिलिमे सुरंग तक भारी बचाव मशीनरी पहुंचाना मौजूदा परिस्थितियों में बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसे देखते हुए राहत दल सुरंग के प्रवेश द्वार तक पहुंचने के लिए अस्थायी रास्ता तैयार कर रहे हैं।
इस रास्ते के जरिए Excavators और अन्य Heavy Machinery को सीधे सुरंग के मुहाने तक ले जाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, ट्रैक बनाने का काम लगातार आगे बढ़ रहा है और इसके अगले दो से तीन दिनों में पूरा होने की उम्मीद है।
मुश्किल हालात के बीच जारी है Rescue Operation
दुर्गम पहाड़ी इलाका, सीमित सड़क संपर्क और सुरंग तक भारी उपकरण पहुंचाने की कठिनाई के कारण बचाव अभियान को काफी सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। अस्थायी रास्ता तैयार होने के बाद भारी मशीनों की मदद से खोज अभियान को और गति मिलने की उम्मीद है।
भारत की ओर से राहत सामग्री, तकनीकी उपकरण, विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम और फोरेंसिक संसाधन भेजे जाने से नेपाल के आपदा राहत अभियान को अतिरिक्त सहायता मिल रही है। भारत ने 26 अगस्त से लगातार राहत सामग्री भेजकर पड़ोसी देश के साथ अपनी मानवीय सहायता को मजबूत किया है।

