नई दिल्ली. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले स्थित रणनीतिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण Lipulekh Pass से भारत-चीन सीमा व्यापार (India-China Border Trade) छह साल के लंबे अंतराल के बाद फिर शुरू होने जा रहा है। सीमा व्यापार की बहाली के तहत भारतीय व्यापारियों का पहला दल जल्द ही तिब्बत (Tibet) में प्रवेश करेगा। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, पहले चरण में कुल 26 Trade Pass जारी किए गए हैं। इनमें 17 व्यापारी और 9 सहायक शामिल हैं। व्यापारियों को सीमा पार माल ले जाने और व्यापारिक गतिविधियों को संचालित करने की अनुमति दी गई है। व्यापार को सुचारु बनाने के लिए गुंजी क्षेत्र में एक Customs Office भी स्थापित किया गया है, जहां आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
व्यापारियों ने पहले से जमा किया सामान
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, कई व्यापारियों ने सीमा के नजदीकी गांवों में स्थित गोदामों में अपना माल पहले ही जमा कर दिया है। इससे व्यापार शुरू होते ही सामान को तेजी से तिब्बत पहुंचाया जा सकेगा। प्रशासन ने व्यापारिक गतिविधियों को आसान बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं।
दूसरे चरण की तैयारी भी शुरू
सीमा व्यापार को लेकर कारोबारियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रशासन को अब तक 103 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इसी को देखते हुए जल्द ही दूसरे चरण में करीब 25 और व्यापारियों को Border Trade Pass जारी करने की तैयारी की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि व्यापारियों की बढ़ती रुचि इस बात का संकेत है कि India-Tibet Trade Route के फिर से सक्रिय होने से सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
माल ढुलाई के लिए विशेष इंतजाम
Lipulekh Pass तक सामान पहुंचाने के लिए प्रशासन ने नाभीढांग के पास एक विशेष स्थान चिन्हित किया है, जहां खच्चरों और घोड़ों की सहायता से माल की ढुलाई की जाएगी। यह स्थान दर्रे से लगभग 600 मीटर की दूरी पर स्थित है। पहाड़ी और दुर्गम भूभाग को देखते हुए यह व्यवस्था व्यापारियों के लिए काफी उपयोगी मानी जा रही है।
1991 में शुरू हुआ था व्यापार, 2020 में लगा था विराम
भारत और तिब्बत के बीच सीमा व्यापार की शुरुआत वर्ष 1991 में दोबारा हुई थी। इसके बाद कई वर्षों तक यह व्यापारिक गतिविधि जारी रही। हालांकि वर्ष 2020 में COVID-19 Pandemic के दौरान सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से इस व्यापार को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।
अब छह साल बाद Border Trade Resumption के साथ एक बार फिर इस ऐतिहासिक व्यापारिक मार्ग पर गतिविधियां शुरू होने जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल स्थानीय व्यापार को लाभ मिलेगा, बल्कि भारत और तिब्बत के बीच पारंपरिक व्यापारिक संबंध भी मजबूत होंगे।
सीमावर्ती अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा
Lipulekh Pass के जरिए व्यापार शुरू होने से पिथौरागढ़ और धारचूला क्षेत्र के व्यापारियों, परिवहन सेवाओं, मजदूरों और स्थानीय समुदायों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। लंबे समय से बंद पड़े इस व्यापारिक मार्ग के खुलने को सीमावर्ती विकास और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

