नई दिल्ली: भारत और स्विट्जरलैंड ने व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे, रक्षा, परमाणु ऊर्जा और वैज्ञानिक अनुसंधान समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण फैसले किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति Guy Parmelin के साथ बातचीत के बाद कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने पर सहमति बनी है। दोनों नेताओं की बातचीत के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के कृषि उत्पादों, pharmaceuticals, textiles और engineering goods के लिए Swiss market में market access बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे।
भारत और European Free Trade Association (EFTA) के बीच Trade and Economic Partnership Agreement (TEPA) अक्टूबर 2025 में लागू हुआ था। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे यूरोप के किसी economic bloc के साथ भारत का पहला Free Trade Agreement बताया। इस समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख direct jobs के लक्ष्य की बात कही गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि Swiss President Guy Parmelin के व्यक्तिगत समर्थन ने इस समझौते को लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Swiss investment के लिए नए क्षेत्रों पर जोर
दोनों देशों के बीच बातचीत में भारत में नए Swiss investments को आकर्षित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। Biotechnology, life sciences, banking, insurance, food processing और sustainability जैसे क्षेत्रों को सहयोग के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। सरकार के अनुसार, इससे दोनों देशों के बीच trusted supply chains विकसित करने और वैश्विक जरूरतों के लिए reliable solutions तैयार करने में मदद मिल सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने Swiss infrastructure companies को भारत में बड़े स्तर पर निवेश करने और capacity building, design तथा manufacturing में भागीदारी का भी आमंत्रण दिया। भारत और स्विट्जरलैंड ने transport, mobility और infrastructure के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता भी किया है। इसके तहत sustainable infrastructure, mobility systems, electric vehicles, ropeways और tunnels जैसे क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
भारत में Varanasi Ropeway, Noida का Jewar Airport और पहाड़ी क्षेत्रों में railway तथा tunnelling projects को दोनों देशों के मौजूदा infrastructure cooperation के उदाहरण के तौर पर बताया गया। नए समझौते से इन क्षेत्रों में तकनीक और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को और बढ़ाने की उम्मीद है।
Defence और Nuclear Energy में भी बढ़ेगा सहयोग
भारत और स्विट्जरलैंड ने military exchanges और defence production में सहयोग की नई संभावनाओं पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों पक्षों ने nuclear energy cooperation को भी आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच science और technology cooperation को मजबूत करने के लिए नए joint research projects शुरू किए जाएंगे।
इन research projects के लिए health, clean energy और space जैसे priority areas को चुना गया है। इसके अलावा University of Zurich के साथ हुए समझौते का उद्देश्य Indian science startups की क्षमता बढ़ाना है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारत और Swiss research communities के बीच लंबे समय की scientific collaboration को बढ़ावा देने के लिए भी नई पहल की गई है।
Indian students और young professionals के लिए नए अवसर
भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों में people-to-people ties को भी अहम आधार बताया गया। दोनों देशों ने Migration and Mobility Partnership Agreement और Young Professionals Agreement पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों से भारतीय students, researchers, professionals और young people के लिए Switzerland में नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। Young Professionals Agreement के तहत दोनों देशों से हर साल 300 युवाओं के exchange का प्रावधान है, जिसे बढ़ाकर 500 तक किया जा सकता है।
दोनों देशों ने योग और Ayurveda के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। Switzerland में इन दोनों की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए संबंधित क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावना पर बातचीत हुई।
Ukraine और West Asia समेत वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा
बातचीत के दौरान international issues पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड democratic values, rule of law, dialogue और diplomacy में विश्वास रखते हैं और global peace तथा stability के लिए मिलकर काम करते रहेंगे। उन्होंने Ukraine और West Asia में शांति के लिए meaningful efforts का समर्थन करने की भारत की नीति का भी उल्लेख किया।
दोनों देशों ने यह भी माना कि बढ़ती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए global institutions में reforms जरूरी हैं। इससे साफ है कि द्विपक्षीय आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के साथ दोनों देश multilateral platforms पर भी coordination बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
7 अक्टूबर को Prosperity Summit
Swiss President Guy Parmelin एक बड़े business delegation के साथ भारत आए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि 7 October को India-EFTA business leaders के साथ Prosperity Summit आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य भारत और EFTA के बीच trade और investment partnership को concrete business outcomes में बदलना है।
AI के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं बनी हुई हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने Switzerland में अगले साल होने वाले Geneva AI Summit के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड responsible, inclusive और human-centric Artificial Intelligence को बढ़ावा देने की दिशा में साथ काम कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने भारत और स्विट्जरलैंड के ऐतिहासिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 19वीं सदी में Swami Vivekananda ने Swiss Alps में Himalayas की झलक देखी थी, जबकि Mahatma Gandhi ने भी Switzerland में समय बिताया और वहां के लोगों से संवाद किया था। अब innovation, infrastructure और advanced technology दोनों देशों की साझेदारी के नए स्तंभ बन रहे हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, मौजूदा बातचीत से भारत-स्विट्जरलैंड partnership को आगे नई गति मिलने की उम्मीद है।

