नई दिल्ली. भारत के रूस से आयात में जनवरी 2026 में तेज गिरावट दर्ज की गई है। आधिकारिक व्यापार आंकड़ों के अनुसार, रूस से भारत के मर्चेंडाइज आयात में लगभग 40% की कमी आई और यह घटकर लगभग 2.86 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वर्ष इसी महीने में करीब 4.81 अरब डॉलर था।
इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण रूसी कच्चे तेल (crude oil) की खरीद में कमी बताया जा रहा है। आम तौर पर रूस से भारत के कुल आयात में करीब 80% हिस्सा पेट्रोलियम क्रूड का होता है, और जनवरी में इसका मूल्य लगभग 2.3 अरब डॉलर या उससे कम आंका गया।
तेल आयात क्यों घटे?
रिपोर्टों के अनुसार, यह कमी कई आर्थिक और भू-राजनीतिक कारणों से जुड़ी है:
भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज, जो पहले रूसी तेल का बड़ा खरीदार था, ने जनवरी में कोई नई खेप आने की उम्मीद नहीं जताई।
अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता और 2025 में लगाए गए दंडात्मक टैरिफ के बाद आयात में कमी का रुझान शुरू हुआ।
शिप-ट्रैकिंग और ऊर्जा बाजार डेटा बताते हैं कि भारतीय कंपनियां अब मिडिल ईस्ट, अमेरिका और लैटिन अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदने पर विचार कर रही हैं।
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि बाजार परिस्थितियां, कीमतें और सप्लाई-चेन जोखिम भी खरीद निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से तेल आयात में यह गिरावट निकट भविष्य में जारी रह सकती है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध बनाने की रणनीति अपना रहा है।
इसी दौरान रूस से कम खरीद के साथ-साथ चीन जैसे देश रूसी तेल के बड़े खरीदार बनते जा रहे हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा व्यापार का संतुलन बदल रहा है।
