नई दिल्ली. प्रधानमंत्री Narendra Modi ने रविवार को भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति और स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को देश के भविष्य की बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि भारत अब केवल निर्माता (Nirmata) ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर निर्णायक (Nirnayak) भूमिका निभाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में 40 से अधिक स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बियां भारतीय नौसेना में शामिल की गई हैं, जबकि वर्तमान में 45 बड़े नौसैनिक प्लेटफॉर्म निर्माणाधीन हैं।
प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल की राजधानी Kolkata में भारतीय नौसेना के तीन स्वदेशी युद्धपोतों—INS Dunagiri, INS Sanshodhak और INS Agray—के कमीशनिंग समारोह को संबोधित कर रहे थे।
नौसेना को मिली तीन नई स्वदेशी ताकतें
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन तीनों युद्धपोतों का भारतीय नौसेना में शामिल होना आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता का प्रमाण है। ये जहाज समुद्री सुरक्षा, हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता को मजबूत करेंगे।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीक से निर्मित ये प्लेटफॉर्म केवल रक्षा क्षेत्र की उपलब्धि नहीं हैं, बल्कि भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और औद्योगिक विकास की भी मिसाल हैं।
45 बड़े नौसैनिक प्लेटफॉर्म निर्माणाधीन
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में इस समय 45 बड़े नौसैनिक प्लेटफॉर्म निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं बल्कि भारत की औद्योगिक क्षमता, तकनीकी दक्षता और भविष्य की शक्ति का संकेत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हर कुछ सप्ताह में भारतीय नौसेना को नई ताकत मिल रही है और यह दर्शाता है कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
रोजगार का बड़ा इंजन बनेगा समुद्री क्षेत्र
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समुद्री क्षेत्र को केवल एक उद्योग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह विकसित भारत के लिए रोजगार सृजन का एक बड़ा इंजन बनने जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एक आधुनिक जहाज के निर्माण में स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और हजारों पुर्जों की आवश्यकता होती है। इसके पीछे हजारों कंपनियां और लाखों लोग काम करते हैं। ऐसे में जहाज निर्माण उद्योग देश में बड़े पैमाने पर रोजगार और आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है।
200 से अधिक MSME ने निभाई अहम भूमिका
प्रधानमंत्री ने बताया कि जिन तीन जहाजों को आज नौसेना में शामिल किया गया है, उनके निर्माण में 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) ने योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि रक्षा और जहाज निर्माण क्षेत्र में निवेश का सीधा लाभ छोटे उद्योगों और युवाओं को रोजगार के रूप में मिलता है। यही कारण है कि सरकार जहाज निर्माण को राष्ट्रीय मिशन के रूप में आगे बढ़ा रही है।
समुद्री क्षेत्र के लिए 70 हजार करोड़ रुपये का प्रोत्साहन
प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने जहाज निर्माण और शिपिंग सेक्टर के लिए 70 हजार करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पैकेज घोषित किया है। उन्होंने इसे केवल आर्थिक फैसला नहीं बल्कि भारत के समुद्री भविष्य में निवेश बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत, जहाज पुनर्चक्रण और एमआरओ (Maintenance, Repair and Overhaul) गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार नीतिगत सुधार कर रही है।
आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण को मिली नई मजबूती
भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो और Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) द्वारा डिजाइन और निर्मित इन जहाजों को देश की रक्षा क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता में वृद्धि से भारत न केवल अपनी सुरक्षा जरूरतों को पूरा कर सकेगा, बल्कि भविष्य में वैश्विक रक्षा और समुद्री उद्योग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
‘निर्माता से निर्णायक’ बनने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब केवल उत्पाद बनाने वाला देश नहीं रहना चाहता, बल्कि वैश्विक नीतियों और समुद्री रणनीतियों को प्रभावित करने वाली शक्ति बनना चाहता है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत समुद्री क्षेत्र में दुनिया की प्रमुख शक्तियों में शामिल होगा।
