नई दिल्ली. भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया की उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिनमें भारत को वैश्विक टेक्सटाइल कचरे का डंपिंग ग्राउंड बताया गया था। सरकार ने कहा है कि देश का टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम मुख्य रूप से घरेलू स्रोतों पर आधारित है और यहां संभाले जाने वाले 90 प्रतिशत से अधिक टेक्सटाइल वेस्ट की उत्पत्ति भारत के भीतर ही होती है।
घरेलू कपड़ा कचरे का सबसे बड़ा हिस्सा
Ministry of Textiles ने बयान जारी कर कहा कि भारत में टेक्सटाइल वेस्ट का बड़ा हिस्सा फैक्ट्री स्क्रैप और इस्तेमाल किए जा चुके घरेलू कपड़ों से आता है।
मंत्रालय के मुताबिक कुल टेक्सटाइल वेस्ट में आयातित कचरे की हिस्सेदारी केवल लगभग 7 प्रतिशत है और यह भी सख्त नियमों के तहत नियंत्रित किया जाता है।
सीमित और नियंत्रित हैं टेक्सटाइल वेस्ट आयात
सरकार ने स्पष्ट किया कि आयातित टेक्सटाइल वेस्ट मुख्य रूप से सेकेंड हैंड कपड़ों और छांटे गए टेक्सटाइल मटेरियल के रूप में आता है, जिसे औपचारिक व्यापार चैनलों के जरिए आयात किया जाता है।
मंत्रालय ने कहा कि इन आयातों पर मौजूदा वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत निगरानी रखी जाती है।
भारत में हर साल 7073 किलो टन टेक्सटाइल वेस्ट
सरकार ने “Mapping of Textile Waste Value Chain in India (2026)” अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि भारत में हर साल लगभग 7,073 किलो टन टेक्सटाइल वेस्ट उत्पन्न होता है। रिपोर्ट के अनुसार प्री-कंज्यूमर इंडस्ट्रियल वेस्ट की रिकवरी दर लगभग 97 प्रतिशत तक है, जो भारत के रीसाइक्लिंग नेटवर्क की मजबूती को दर्शाती है।
₹22,000 करोड़ का आर्थिक मूल्य
सरकार ने FICCI के अनुमान का उल्लेख करते हुए कहा कि टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग सेक्टर का वार्षिक आर्थिक मूल्य लगभग ₹22,000 करोड़ है।
यह उद्योग पुन: उपयोग (Reuse), छंटाई (Sorting) और रीसाइक्लिंग गतिविधियों के जरिए औपचारिक और अनौपचारिक दोनों क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियां पैदा कर रहा है।
रीसाइक्लिंग से कम होता है प्रदूषण
Indian Institute of Technology Delhi द्वारा किए गए लाइफ साइकिल असेसमेंट (LCA) अध्ययनों का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग से नए फाइबर उत्पादन की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल में कमी आती है। इन अध्ययनों में पानीपत जैसे प्रमुख रीसाइक्लिंग क्लस्टर्स के डेटा का इस्तेमाल किया गया।
पानीपत, सूरत और तिरुपुर जैसे शहर बने केंद्र
सरकार के मुताबिक भारत का टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग नेटवर्क मुख्य रूप से पानीपत, तिरुपुर, लुधियाना और सूरत जैसे औद्योगिक क्लस्टर्स पर आधारित है। ये शहर देश में कपड़ा रीसाइक्लिंग गतिविधियों की रीढ़ माने जाते हैं।
पर्यावरण कानूनों के तहत होती है निगरानी
मंत्रालय ने कहा कि यह उद्योग Water Act 1974 और Air Act 1981 जैसे पर्यावरण कानूनों के तहत संचालित होता है। इसके अलावा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और National Green Tribunal जैसी एजेंसियां निगरानी और नियमों के पालन को सुनिश्चित करती हैं।
सरकार ने चुनौतियों को भी माना
हालांकि सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग सेक्टर अभी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें कचरा संग्रहण प्रणाली की कमी, सिंथेटिक और मिश्रित कपड़ों के निपटान की दिक्कतें, छोटे अनौपचारिक यूनिट्स में नियमों का पालन और श्रमिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। सरकार ने कहा कि यह क्षेत्र अभी बदलाव के दौर से गुजर रहा है और इसे अधिक औपचारिक, पर्यावरण-अनुकूल और सुरक्षित बनाने की दिशा में काम जारी है।
हाई-वैल्यू टेक्निकल टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग पर भी फोकस
Ministry of Textiles ने बताया कि भारत अब हाई-वैल्यू टेक्निकल टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग में भी आगे बढ़ रहा है। नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल्स मिशन के तहत डिफेंस ग्रेड अरामिड फाइबर की रीसाइक्लिंग पर काम चल रहा है। साथ ही एयरोस्पेस और कंपोजिट्स जैसे क्षेत्रों के लिए भी रिसर्च जारी है।
