नई दिल्ली. राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच टकराव की कड़ी में ताज़ा मामला कर्नाटक से सामने आया है। गुरुवार को कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत विधानसभा में केवल दो पंक्तियां पढ़ने के बाद ही सदन से बाहर निकल गए। बताया जा रहा है कि वे सरकार द्वारा तैयार किए गए अपने भाषण के 11 पैराग्राफ को लेकर नाराज़ थे, जिनमें केंद्र सरकार और उसकी नीतियों पर कथित तौर पर आलोचनात्मक टिप्पणी थी।
भाषण से 11 पैराग्राफ हटाने की मांग
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्यपाल गहलोत चाहते थे कि सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण से 11 पैराग्राफ हटाए जाएँ। इन हिस्सों में कथित रूप से केंद्र सरकार की नीतियों, मनरेगा (MGNREGA) के “खत्म किए जाने” और राज्यों को मिलने वाले फंड के बँटवारे से जुड़े मुद्दों का ज़िक्र था।
विधानसभा पहुंचने पर खत्म हुआ राजनीतिक सस्पेंस
शुरुआत में जब राज्यपाल विधान सौध पहुंचे और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने उनका स्वागत किया, तो कई घंटों से चल रहा राजनीतिक सस्पेंस खत्म होता दिखाई दिया।
हालांकि, संयुक्त सत्र में राज्यपाल द्वारा भाषण को बीच में ही समाप्त करने पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि राज्यपाल का यह कदम संविधान का उल्लंघन है।
केवल दो पंक्तियाँ पढ़कर किया भाषण समाप्त
गुरुवार को राज्यपाल ने सदन के सदस्यों का अभिवादन किया और कहा कि उन्हें संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए खुशी हो रही है। इसके बाद उन्होंने हिंदी में केवल यह कहा—
“मेरी सरकार राज्य के आर्थिक, सामाजिक और भौतिक विकास को दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है।
जय हिंद, जय कर्नाटक।”
इतना कहकर उन्होंने अपना भाषण समाप्त कर दिया।
कांग्रेस का विरोध, सदन में नारेबाज़ी
राज्यपाल के इस कदम से कांग्रेस विधायकों में भारी नाराज़गी देखने को मिली और सदन के भीतर “शेम, शेम” के नारे लगाए गए।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि राज्यपाल ने सरकार द्वारा तैयार पूरा भाषण न पढ़कर संविधान का उल्लंघन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने “केंद्र सरकार की कठपुतली” की तरह व्यवहार किया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार राज्यपाल के आचरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रही है।
‘केंद्र सरकार टैक्स टेररिज्म लागू कर रही’
कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने केंद्र सरकार पर “टैक्स टेररिज्म” लागू करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार VB-G Ram G Act (Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission – Gramin), मनरेगा को कमजोर करने और पंचायतों के अधिकारों जैसे मुद्दों को उठा रही है।
खड़गे ने कहा, “हम मज़दूरों की न्यूनतम मज़दूरी में कटौती, सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसे मुद्दों की बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने खुद प्रधानमंत्री से मुलाकात कर हमारी समस्याएँ रखी हैं। हमने भाषण में सिर्फ़ तथ्य रखे हैं, एक भी पंक्ति झूठी नहीं है। फिर भी राज्यपाल उसे पढ़ना नहीं चाहते। उन्हें आदेश कहाँ से मिल रहे हैं? क्या राजभवन भाजपा का दफ्तर बन गया है?”
राज्यपाल बनाम राज्य सरकार: पुराना विवाद
कर्नाटक पहला राज्य नहीं है जहाँ राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच टकराव हुआ हो। खासतौर पर गैर-भाजपा शासित राज्यों में यह विवाद लंबे समय से देखने को मिल रहा है।
हाल ही में केरल और तमिलनाडु में भी इसी तरह की स्थिति सामने आई थी।
केरल
केरल विधानसभा में उस समय तनाव पैदा हुआ जब मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने आरोप लगाया कि राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने अपने अभिभाषण से केंद्र की वित्तीय नीतियों की आलोचना और विधेयकों को मंजूरी में देरी से जुड़े हिस्सों को हटा दिया।
तमिलनाडु
तमिलनाडु में राज्यपाल आरएन रवि ने भी परंपरागत अभिभाषण पढ़ने से इनकार कर दिया और यह आरोप लगाते हुए सदन से बाहर निकल गए कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु ने कहा कि राज्यपाल को केवल वही भाषण पढ़ना चाहिए जो मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत हो।
