नई दिल्ली. जापान ने भारत से आमों के आयात पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह फैसला भारतीय निर्यात केंद्रों में पेस्ट कंट्रोल और क्वारंटीन प्रक्रियाओं में कथित खामियां पाए जाने के बाद लिया गया। इस कदम से गर्मियों के पीक सीजन में भारतीय आम निर्यातकों और किसानों को बड़ा झटका लगा है।
अल्फांसो समेत कई प्रीमियम आम प्रभावित
इस रोक का असर भारत के प्रीमियम आमों जैसे Alphonso mango, Kesar mango, लंगड़ा और बंगनपल्ली किस्मों पर पड़ा है, जिन्हें जापान में खास मांग के साथ निर्यात किया जाता है।
जापानी अधिकारियों ने जताई पेस्ट कंट्रोल पर चिंता
रिपोर्ट्स के मुताबिक जापानी निरीक्षकों ने भारत के Vapour Heat Treatment (VHT) केंद्रों में कई अनियमितताएं पाई हैं। इन केंद्रों में आमों को निर्यात से पहले कीटमुक्त किया जाता है ताकि फल मक्खी जैसे खतरनाक कीटों को रोका जा सके।
फ्रूट फ्लाई को लेकर जापान की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
जापान फल मक्खी जैसे आक्रामक कीटों को लेकर बेहद सख्त नीति अपनाता है। वहां की सरकार इन्हें घरेलू कृषि के लिए बड़ा खतरा मानती है, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाता।
25 मार्च 2026 के बाद के सर्टिफिकेट वाले शिपमेंट रोके गए
बताया जा रहा है कि जापान के योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन विभाग ने आयातकों को सूचित किया है कि 25 मार्च 2026 के बाद जारी निरीक्षण प्रमाणपत्र वाले भारतीय आमों की खेप स्वीकार नहीं की जाएगी।
करीब 20 साल बाद जापान ने लगाया बड़ा प्रतिबंध
करीब दो दशकों में यह पहली बार है जब जापान ने भारतीय आमों पर इतना बड़ा प्रतिबंध लगाया है। इससे पहले 2006 में भारत ने अपनी क्वारंटीन और ट्रीटमेंट व्यवस्था सुधारने के बाद जापान का प्रतिबंध हटवाया था।
भारत की साख पर असर पड़ने की आशंका
हालांकि जापान भारत का सबसे बड़ा आम बाजार नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारतीय कृषि निर्यात की साख पर असर डाल सकता है। निर्यातकों को डर है कि इससे दूसरे देशों में भी भारत की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर सवाल उठ सकते हैं।
महाराष्ट्र के किसानों की बढ़ी चिंता
यह फैसला ऐसे समय आया है जब Maharashtra के अल्फांसो उत्पादक किसान पहले ही भीषण गर्मी और एल नीनो प्रभाव के कारण भारी फसल नुकसान झेल रहे हैं। कई सरकारी आकलनों में इस सीजन में 85 से 90 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका जताई गई है।
दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक है भारत
India दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और यहां हर साल लगभग 2.8 करोड़ मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है। हालांकि इसका बड़ा हिस्सा घरेलू खपत में इस्तेमाल होता है।
जापान से बातचीत की तैयारी में भारत
भारतीय अधिकारी और निर्यातक अब जापानी नियामकों के साथ बातचीत कर इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अब क्वारंटीन केंद्रों की निगरानी, दस्तावेजी प्रक्रिया और पेस्ट कंट्रोल सिस्टम को और सख्त बनाना होगा।

