नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते दबाव और मौजूदा भू-राजनीतिक हालात के बीच केंद्र सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 21 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के तहत सुपीरियर केरोसीन ऑयल (Superior Kerosene Oil – SKO) के वितरण की अनुमति दे दी है।
इस संबंध में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गजट अधिसूचना जारी कर दी है। यह अधिसूचना तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है और 60 दिनों तक या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार ने यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे असर और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव को ध्यान में रखते हुए लिया है।
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव, समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता और ईंधन आपूर्ति पर संभावित दबाव को देखते हुए सरकार ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि देश के दूरदराज और जरूरतमंद इलाकों में खाना पकाने और रोशनी के लिए आवश्यक ईंधन उपलब्ध रहे।
जहां सामान्य परिस्थितियों में केरोसीन का उपयोग धीरे-धीरे कम या बंद कर दिया गया था, वहां अब आपातकालीन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसकी फिर से सीमित आपूर्ति की व्यवस्था की गई है।
किन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू होगी व्यवस्था?
यह व्यवस्था 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू की गई है। इनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे बड़े राज्य भी शामिल हैं।
हालांकि अधिसूचना में शामिल सभी राज्यों/UTs की विस्तृत सूची अलग से जारी की गई है, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम उन इलाकों के लिए है जहां जरूरत पड़ने पर घरेलू उपयोग हेतु केरोसीन उपलब्ध कराया जा सके।
केरोसीन-फ्री राज्यों में भी मिलेगी सुविधा
सरकार का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पहले ‘केरोसीन-फ्री’ घोषित किया जा चुका था। अब मंत्रालय ने ऐसे राज्यों/UTs में भी निर्धारित पेट्रोल पंपों को सुपीरियर केरोसीन ऑयल स्टोर और वितरित करने की अनुमति दे दी है, ताकि घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके।
यह सुविधा विशेष रूप से उन इलाकों के लिए उपयोगी मानी जा रही है जहां बिजली आपूर्ति अनियमित है या जहां वैकल्पिक ईंधन तक पहुंच सीमित है।
हर जिले में दो पेट्रोल पंपों को मिलेगी अनुमति
अधिसूचना के अनुसार, प्रत्येक जिले में अधिकतम दो पेट्रोल पंपों को SKO रखने और वितरित करने की अनुमति दी जा सकती है।
प्राथमिकता सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (PSU Oil Companies) के कंपनी-स्वामित्व वाले आउटलेट्स को दी जाएगी।
प्रत्येक अधिकृत पेट्रोल पंप अधिकतम 5,000 लीटर तक केरोसीन स्टोर कर सकेगा। इस व्यवस्था का मकसद है कि जरूरत पड़ने पर ईंधन की उपलब्धता बनी रहे और आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आए।
डीलरों और ट्रांसपोर्टरों को मिली राहत
तेजी से वितरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने डीलरों और ट्रांसपोर्टरों को कुछ लाइसेंसिंग आवश्यकताओं से अस्थायी छूट भी दी है। हालांकि, मंत्रालय ने साफ किया है कि: सुरक्षा मानकों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। निगरानी और मॉनिटरिंग व्यवस्था पूरी तरह लागू रहेगी, भंडारण, परिवहन और वितरण के दौरान सभी नियमों का पालन अनिवार्य होगा यानी सरकार एक ओर तेज आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहती है, तो दूसरी ओर सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करना चाहती।
किन उद्देश्यों के लिए होगा इस्तेमाल?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह केरोसीन केवल घरेलू खाना पकाने घरेलू रोशनी जैसी जरूरतों के लिए ही उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उपयोग व्यावसायिक, औद्योगिक या अन्य गैर-घरेलू उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकेगा।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
इस फैसले का सीधा फायदा उन परिवारों को हो सकता है:जो अभी भी पारंपरिक ईंधन पर निर्भर हैं जहां LPG या बिजली की आपूर्ति बाधित हो सकती है। जहां ग्रामीण या दूरदराज क्षेत्रों में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत सीमित हैं विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम एहतियाती और आपातकालीन ऊर्जा प्रबंधन का हिस्सा है, ताकि वैश्विक संकट की स्थिति में घरेलू जरूरतों पर असर कम से कम पड़े।
सरकार का संदेश: ऊर्जा आपूर्ति पर सतर्क निगरानी
इस निर्णय से यह भी साफ संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर त्वरित हस्तक्षेप करने के लिए तैयार है। भले ही यह व्यवस्था अस्थायी है, लेकिन मौजूदा हालात में इसे आम उपभोक्ताओं के लिए राहत और बैकअप सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है।
