नई दिल्ली: न्यायिक रिक्तियों और लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक अहम और अभूतपूर्व फैसला लिया है। कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में पांच सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को एड-हॉक (अस्थायी) जज के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की है। यह निर्णय 3 फरवरी 2026 को आयोजित कॉलेजियम की बैठक में लिया गया।
कॉलेजियम की सिफारिश
कॉलेजियम ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 224-A के तहत इन सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इनकी नियुक्ति दो वर्षों की अवधि के लिए की गई है। एड-हॉक जज के रूप में नियुक्ति के लिए जिन पांच सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के नाम की सिफारिश की गई है, वे हैं:
जस्टिस मोहम्मद फैज आलम खान
जस्टिस मोहम्मद असलम
जस्टिस सैयद आफताब हुसैन रिजवी
जस्टिस रेनू अग्रवाल
जस्टिस ज्योत्सना शर्मा
अब यह सिफारिश अंतिम मंजूरी और अधिसूचना के लिए केंद्र सरकार के पास भेजी जाएगी।
क्या है अनुच्छेद 224-A?
अनुच्छेद 224-A भारतीय संविधान का एक विशेष प्रावधान है, जिसका उपयोग न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने के लिए किया जाता है। इसे अक्सर न्यायिक व्यवस्था में “निष्क्रिय शक्ति” (Dormant Power) माना जाता है, जिसे विशेष परिस्थितियों में लागू किया जाता है।
अनुच्छेद 224-A की मुख्य विशेषताएं
सेवानिवृत्त जजों की नियुक्ति: यह प्रावधान किसी राज्य के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को हाईकोर्ट में जज के रूप में बैठने और कार्य करने का अनुरोध करने की अनुमति देता है।
उद्देश्य: इसका मकसद अनुभवी जजों की सेवाएं लेकर लंबित मामलों के भारी बोझ को कम करना है।
अधिकार और शक्तियां: अनुच्छेद 224-A के तहत नियुक्त जज को हाईकोर्ट के जज के समान सभी अधिकार और शक्तियां प्राप्त होती हैं। हालांकि, उन्हें स्थायी जज की तरह वरिष्ठता या स्थानांतरण से जुड़े अधिकार नहीं मिलते।
सक्रियता के दिशा-निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के ‘लोक प्रहरी’ फैसले में इस प्रावधान को लागू करने के लिए दिशा-निर्देश तय किए थे, जिसमें लंबित मामलों के अधिक होने पर इस व्यवस्था को अपनाने पर जोर दिया गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट को मिलेगी मजबूती
इलाहाबाद हाईकोर्ट देश के उन उच्च न्यायालयों में शामिल है, जहां लंबित मामलों की संख्या सबसे अधिक है। ऐसे में इन सेवानिवृत्त जजों की नियुक्ति से न्यायिक क्षमता बढ़ने और मामलों के तेजी से निस्तारण में मदद मिलने की उम्मीद है।
