नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में ईरान और USA-इज़राइल संघर्ष के कारण भारत में ईंधन आपूर्ति पर चिंता बढ़ गई है। सरकार ने बुधवार को इस संबंध में नया अपडेट जारी किया। होर्मुज जलडमरूमध्य में 22 भारतीय ध्वज वाले भारतीय टैंकर सीमेंट हुए हैं। इन जहाजों पर लगभग 16.7 मिलियन टन कच्चा तेल, 3.2 मिलियन टन LPG और 2 मिलियन टन LNG लदा हुआ है।
सीमेंट जहाजों का विवरण
विशेष सचिव, जहाजरानी मंत्रालय, राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि सीमेंट हुए जहाजों में शामिल हैं:
6 LPG वाहक
1 LNG टैंकर
4 कच्चे तेल के टैंकर
1 रासायनिक उत्पाद वाहक
3 कंटेनर जहाज
2 बल्क कार्गो वाहक
इसके अलावा, एक ड्रेजर, एक खाली जहाज और तीन जहाज ड्राई डॉक में रखरखाव के लिए मौजूद हैं। सभी 611 नाविक सुरक्षित हैं।
सरकार की कोशिशें
सरकार इन भारतीय टैंकरों को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। जब ये जहाज वापस आएंगे, तब भारत में LPG और गैस आपूर्ति संकट से राहत मिल सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत
होर्मुज जलडमरूमध्य, फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ता है और यह दुनिया का सबसे प्रमुख ऊर्जा शिपिंग मार्ग है। अमेरिका और इजरायल के हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण यह जलमार्ग प्रभावित हुआ है। भारत अपनी कच्चे तेल की करीब 88%, प्राकृतिक गैस की 50% और LPG की 60% आयात इसी मार्ग पर निर्भर करता है।
शुरुआत में इस क्षेत्र में 28 भारतीय जहाज सीमेंट थे। अब 22 जहाज पश्चिमी किनारे पर सीमेंट हैं। पिछले कुछ दिनों में चार जहाज (3 बल्क कैरियर और 1 अफ्रामैक्स टैंकर) सुरक्षित बाहर निकले हैं।
LPG और अन्य ईंधन आयात के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और मजबूती बेहद जरूरी है। भारतीय सरकार और शिपिंग मंत्रालय के प्रयासों पर देश की ऊर्जा आपूर्ति निर्भर है।
