नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में लंबे समय से लंबित Kishau Multipurpose Dam Project को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने की, जिसमें यमुना नदी के पुनर्जीवन (Yamuna River Rejuvenation) के लिए संबंधित राज्यों के बीच व्यापक सहमति बनी।
बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए Memorandum of Understanding (MoU) पर हस्ताक्षर करने पर सहमति जताई। MoU पर हस्ताक्षर के बाद इस परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
कई वर्षों से लंबित परियोजना को मिली नई गति
Kishau Multipurpose Dam Project वर्षों से चर्चा में रही है, लेकिन विभिन्न राज्यों के बीच सहमति न बनने के कारण यह आगे नहीं बढ़ पा रही थी। अब केंद्र सरकार की पहल पर ‘Solutions Through Dialogue’ मॉडल के तहत सभी राज्यों के बीच सहमति बन गई है।
सरकार का कहना है कि यह निर्णय न केवल जल प्रबंधन बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और नदी पुनर्जीवन के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
Yamuna Rejuvenation पर केंद्र का फोकस
इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य यमुना नदी में जल प्रवाह को बढ़ाना और इसे स्वच्छ बनाना है। परियोजना के लागू होने से clean water flow in Yamuna River में सुधार होने की उम्मीद है, जिससे दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में जल संकट को कम किया जा सकेगा।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि नदी पुनर्जीवन के लिए बड़े पैमाने पर integrated water management system की आवश्यकता है।
वित्तीय संरचना पर महत्वपूर्ण सहमति
बैठक में तय किया गया कि परियोजना के जल घटक (water component) की कुल लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा Central Assistance के रूप में वहन किया जाएगा। शेष 10 प्रतिशत वित्तीय भार छह भाग लेने वाले राज्यों द्वारा साझा किया जाएगा।
यह वित्तीय मॉडल केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगात्मक विकास (cooperative federalism) का उदाहरण माना जा रहा है।
बिजली और पानी के बंटवारे पर भी समझौता
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से को दिल्ली और राजस्थान को आवंटित किया जाएगा। इसके बदले में हिमाचल प्रदेश को परियोजना के पावर कंपोनेंट में लागत साझेदारी का लाभ मिलेगा।
इस समझौते को क्षेत्रीय जल प्रबंधन और ऊर्जा संतुलन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उच्चस्तरीय उपस्थिति में हुआ निर्णय
इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री Manohar Lal Khattar और जल शक्ति मंत्री C. R. Patil भी मौजूद रहे। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami सहित विभिन्न वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में consensus-based governance model की सराहना की गई, जिसके तहत वर्षों से लंबित मुद्दों को बातचीत के जरिए हल किया जा रहा है।
Yamuna Revival Mission को मिलेगी नई दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि Kishau Multipurpose Dam Project के आगे बढ़ने से यमुना नदी के पुनर्जीवन अभियान को नई दिशा मिलेगी। इससे न केवल जल उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्रीय जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण में भी सुधार होगा।
निष्कर्ष: Kishau Dam Project पर बनी यह सहमति भारत के जल संसाधन प्रबंधन और अंतर-राज्यीय सहयोग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में Yamuna River rejuvenation mission को मजबूती प्रदान करेगी।
