नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी Lokhande Prashant Sitaram को नया चेयरमैन नियुक्त किया है। इसके साथ ही 2008 बैच के भारतीय सूचना सेवा (IIS) अधिकारी Varun Bhardwaj को CBSE का नया सचिव बनाया गया है।
यह नियुक्तियां ऐसे समय में हुई हैं जब बोर्ड का ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम विवादों में घिरा हुआ है और परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
राहुल सिंह और हिमांशु गुप्ता की हुई विदाई
सरकार का यह फैसला CBSE चेयरमैन Rahul Singh और सचिव Himanshu Gupta के स्थानांतरण के कुछ घंटों बाद सामने आया। दोनों अधिकारियों को कक्षा 12वीं की परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच बोर्ड से हटा दिया गया।
कौन हैं लोकहांडे प्रशांत सीताराम?
लोकहांडे प्रशांत सीताराम वर्ष 2001 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं और AGMUT कैडर से संबंधित हैं। वर्तमान में वह गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं। प्रशासनिक अनुभव और विभिन्न मंत्रालयों में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें CBSE की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वहीं नए सचिव वरुण भारद्वाज फिलहाल शिक्षा मंत्रालय में निदेशक के रूप में कार्य कर रहे हैं।
OSM सिस्टम की जांच के लिए बनी समिति
CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर उठे विवाद के बाद केंद्र सरकार ने जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता S Radha Chauhan करेंगी, जो वर्तमान में क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission) की अध्यक्ष हैं।
कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार समिति को आवश्यकता पड़ने पर अन्य विभागों के अधिकारियों की सहायता लेने का अधिकार होगा। जांच रिपोर्ट एक महीने के भीतर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को सौंपनी होगी।
क्या है OSM सिस्टम विवाद?
हाल ही में कई कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों ने आरोप लगाया था कि CBSE पोर्टल पर अपलोड की गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी उनकी लिखावट से मेल नहीं खा रही थी। इसके बाद उत्तर पुस्तिकाओं के संभावित मिलान में गड़बड़ी को लेकर सवाल उठने लगे।
छात्रों और अभिभावकों ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली की पारदर्शिता पर चिंता जताई। इसके अलावा तकनीकी खामियां, भुगतान संबंधी समस्याएं तथा उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन में देरी को लेकर भी बोर्ड की आलोचना हुई। इन घटनाओं के बाद परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया में अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है।
