नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने देश के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारी में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
यह परीक्षण इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अंतरिक्ष से लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों (एस्ट्रोनॉट्स) को सुरक्षित तरीके से धरती पर वापस लाया जा सके।
कैसे हुआ यह परीक्षण?
इस परीक्षण में क्रू मॉड्यूल (Crew Module) यानी वह कैप्सूल, जिसमें अंतरिक्ष यात्री बैठेंगे, को हवा में छोड़ा गया। इसके बाद उसमें लगे 10 पैराशूट एक-एक करके तय क्रम में खुले।
इन पैराशूटों की मदद से कैप्सूल की गति धीरे-धीरे कम हुई और उसे सुरक्षित स्प्लैशडाउन (समुद्र में सुरक्षित उतरने) की स्थिति तक लाया गया। यह पूरी प्रक्रिया सफल रही, जिससे यह साबित हुआ कि आपात स्थिति में भी क्रू मॉड्यूल सुरक्षित तरीके से धरती पर वापस आ सकता है।
क्या होता है एयर ड्रॉप टेस्ट?
एयर ड्रॉप टेस्ट के दौरान किसी विमान या हेलीकॉप्टर से क्रू मॉड्यूल को एक निश्चित ऊंचाई से नीचे छोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष यान की वापसी के आखिरी चरण की परिस्थितियों को जमीन पर ही परखना होता है।
इस दौरान यह देखा जाता है कि पैराशूट सही समय पर खुलते हैं या नहीं, किसी पैराशूट के काम नहीं करने की स्थिति में सिस्टम कैसा प्रदर्शन करता है और समुद्र में उतरते समय कैप्सूल पूरी तरह सुरक्षित रहता है या नहीं।
पहला परीक्षण भी रहा था सफल
इससे पहले 24 अगस्त 2025 को पहला इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-01) भी सफलतापूर्वक किया गया था।
उस समय भारतीय वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर से करीब 3 किलोमीटर की ऊंचाई से लगभग 4.8 टन वजनी डमी क्रू मॉड्यूल को नीचे छोड़ा गया था। पहले परीक्षण में भी पैराशूट सिस्टम और सुरक्षित लैंडिंग की प्रक्रिया सफल रही थी।
अब दूसरे सफल परीक्षण के बाद गगनयान मिशन की तैयारियों को और मजबूती मिली है।
2027 में होगा भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन
ISRO की योजना के अनुसार भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान वर्ष 2027 में श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा।
इस मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा और तय समय पूरा करने के बाद उन्हें सुरक्षित धरती पर वापस लाया जाएगा। गगनयान मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने दी बधाई
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दूसरे एयर ड्रॉप टेस्ट की सफलता पर ISRO की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को मिलेगी नई पहचान
गगनयान मिशन के लिए लगातार हो रहे सफल परीक्षण यह दिखाते हैं कि भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मिशन के सफल होने पर भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने अपने दम पर इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता विकसित की है। यह उपलब्धि भारत के विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने वाली साबित होगी।

