नई दिल्ली. Rajasthan Panchayat Elections को लेकर एक बार फिर बड़ा अपडेट सामने आया है। High Court द्वारा तय की गई 31 जुलाई 2026 की समयसीमा अब करीब है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए तय समय तक पंचायत चुनाव कराना मुश्किल माना जा रहा है। चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई अहम चरण अब भी पूरे नहीं हुए हैं, जिससे State Election Commission के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
High Court की Deadline पूरी करना क्यों मुश्किल?
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और State Election Commission को 31 जुलाई तक पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि अब इस समयसीमा में केवल कुछ ही दिन बचे हैं, जबकि पंचायत और निकाय चुनावों की पूरी प्रक्रिया पूरी करने में सामान्य तौर पर 40 से 45 दिन का समय लगता है।
ऐसे में प्रशासनिक तैयारियों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए तय समय पर चुनाव कराना कठिन माना जा रहा है।
Reservation List का इंतजार, Election Commission ने भेजा Reminder
चुनाव आयोग अभी भी Panchayati Raj Department और Urban Local Bodies Department से SC, ST, OBC और Women Reservation से जुड़ी अंतिम सूची मिलने का इंतजार कर रहा है।
बताया जा रहा है कि आयोग इस संबंध में राज्य सरकार को Reminder भी भेज चुका है। आरक्षण सूची जारी होने के बाद ही निर्वाचन क्षेत्रों का अंतिम निर्धारण और आगे की चुनावी प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
OBC Survey की तैयारी तेज
इधर Rajasthan Other Backward Classes Political Representation Commission ने OBC Survey की जमीनी तैयारियां तेज कर दी हैं। आयोग के सदस्य गोपाल कृष्ण शर्मा ने हाल ही में बांसवाड़ा, डूंगरपुर और सिरोही जिलों का दौरा कर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सर्वे केवल OBC परिवारों तक सीमित रहेगा और अन्य वर्गों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।
Panchayat Elections पर बढ़ा राजनीतिक विवाद
पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। हाल ही में State Finance Commission के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा था कि ‘One State, One Election’ की अवधारणा के तहत पंचायत और निकाय चुनाव अक्टूबर से दिसंबर के बीच कराए जा सकते हैं।
High Court के आदेश का हवाला देकर उठे सवाल
अरुण चतुर्वेदी के बयान पर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट पहले ही 31 जुलाई 2026 तक चुनाव कराने के निर्देश दे चुका है, ऐसे में बाद की तारीखों की बात करना न्यायालय के आदेशों के अनुरूप नहीं है।
लोढ़ा ने मांग की कि संवैधानिक पद पर बैठे लोगों को अदालत के आदेशों का सम्मान करना चाहिए और सार्वजनिक रूप से उनका पालन सुनिश्चित करने की बात करनी चाहिए।
क्या आगे बढ़ सकती है चुनाव की तारीख?
फिलहाल Reservation Process, OBC Survey और प्रशासनिक तैयारियों के अधूरे रहने के कारण 31 जुलाई तक पंचायत चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर राज्य सरकार, निर्वाचन आयोग और हाईकोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी है, जिससे राजस्थान के पंचायत और निकाय चुनावों की नई दिशा तय होगी।

