नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सियासी माहौल तेज हो गया है। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अब एक “तुगलकी आयोग” की तरह काम कर रहा है और किसी राजनीतिक दल के निर्देश पर निर्णय ले रहा है।
मतदाता सूची संशोधन को लेकर विवाद
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्य में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि 58 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए और इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का दुरुपयोग किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह कार्रवाई भारतीय जनता पार्टी के निर्देश पर की जा रही है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग भारत का सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी कर रहा है और मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रही।
“तुगलकी” शब्द का संदर्भ
“तुगलकी” शब्द का इस्तेमाल करते हुए ममता बनर्जी ने मध्यकालीन दिल्ली सल्तनत के शासक मुहम्मद बिन तुगलक का उल्लेख किया, जिन्हें इतिहास में उनके अप्रत्याशित और विवादित फैसलों के लिए जाना जाता है।
राज्य में चुनाव की तैयारियों के बीच मतदाता सूची संशोधन को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं, जिससे पश्चिम बंगाल की राजनीति और अधिक गर्मा गई है।
