सोलन. ज़रा याद करो कुर्बानी, कुछ ऐसा ही कहना चाहती हैं, कश्मीर में पुलवामा जिले के पंपोर में आतंकियों से संघर्ष करते शहीद हुए लांस नायक ओम प्रकाश की पत्नी का. जो आज गुमनामी का जीवन जीने को मजबूर हो चुकी हैं. लेकिन देश भक्ति का जज्बा आज भी उनकी पत्नी कृष्णा में भी ज़िंदा है.
अपने पति के सपने को पूरा करने के लिए वह अपने गाँव छोड़कर सोलन शहर में एक छोटा सा कमरा लेकर अपनी दो बच्चियों का लालन पालन कर रही है. ताकि वह अपने बच्चियों को पढ़ा कर अपने स्वर्गीय पति के सपनों को साकार कर सके.
शहीद की पत्नी कृष्णा ने सरकार के प्रति अपना गुस्सा जाहिर किया. कृष्णा ने कहा कि उनके पति जब शहीद हुए थे तो सरकार व फ़ौज ने बड़े-बड़े वादे किए थे. अधिकारियों ने शहीद स्मारक और शहीद के नाम पर स्कूल व सड़क का नाम देने का आश्वासन दिया था. साथ ही उसे फ़ौज में एक वर्ष से पहले नौकरी देने का वायदा भी किया था. कृष्णा एम. ए. बी एड हैं और स्वाबलम्बी बनना चाहती हैं. लेकिन अभी तक करीबन ढाई वर्ष बीतने को हैं लेकिन अभी तक उसे नौकरी तो क्या कोई उसका हाल तक पूछने कोई नहीं आया है.
ओम प्रकाश 9 पैरा बटालियन में स्पेशल कमांडो फ़ोर्स का जवान था. जो की लास नायक के पद पर तैनात था. उधमपुर से उसकी ड्यूटी जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में लगी थी. जहाँ से माध्यरात्रि उन्हें स्पेशल टास्क पर भेजा गया था.
इस दौरान सीआरपीएफ के काफिले पर पांपोर के समीप हथियारबंद आतंकियों ने हमला बोल दिया था. इसी आतंकी हमले में आंतकियों से भिड़ते-भिड़ते हिमाचल प्रदेश के फौजी लास नायक ओम प्रकाश शहीद हो गये. वह देश के लिए शहीद हो गये .परन्तु आज उनके परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं है.